जज अपनी सीमाएं पहचानें : चीफ जस्टिस सूर्यकांत

    15-Feb-2026
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CJI 
जज अपनी सीमाएं पहचानें, गलतियाें से सीखें. यह प्रतिपादन चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने किया. वे शनिवार काे नई दिल्ली में काॅमनवेल्थ ज्यूडिशियल एजुकेटर्स की 11वीं द्विवार्षिक बैठक के उद्घाटन समाराेह काे संबाेधित कर रहे थे.जस्टिस सूर्यकांत ने कहा- जज और न्यायिक संस्थाएं दाेनाें ही सीखन, सुधार करने और आगे बढ़ने में सक्षम हाेते हैं.दिखावे से ज्यूडिशियल लीडरशिप काे नुकसान हाेता है. चीफ जस्टिस ने कहा कि न्यायिक नेतृत्व इस कारण कमजाेर नहीं हाेता कि जज परफेक्ट नहीं हैं, बल्कि तब प्रभावित हाेता है जब जज यह दिखाने लगते हैं कि वे बिल्कुल परफेक्ट हैं.
 
उन्हाेंने न्यायिक नेतृत्व काे देखने के तरीके में बदलाव की जरूरत बताई. साथ ही सुझाव दिया कि राष्ट्रमंडल देशाें में न्यायिक शिक्षा, बार और बेंच (जज) काे जाेड़ने के लिए एक संस्था बनाई जानी चाहिए. उन्हाेंने कहा- जजाें का काम केवल पुराने फैसल(नजीर) की जानकारी रखना ही नहीं है, बल्कि कानून की ऐसी व्याख्या करना भी है जाे आज के समय में न्याय दिला सके.इतिहास में सबसे सम्मानित न्यायिक नेता वे थे, जिन्हाेंने खुद काे पूर्ण नहीं बताया. वे अपनी सीमाओं काे समझते थे, गलती की संभावना काे स्वीकार करते थे और सीखने के लिए तैयार रहते थे. विनम्रता केवल व्यक्तिगत गुण नहीं है, बल्कि एक पेशेवर सुरक्षा कवच भी है. यह गुण हर न्यायिक अधिकारी काे सिखाया जाना चाहिए.