संघर्ष, संकल्प और समाज के प्रति जिम्मेदारी से ही सफलता

कानून, अभिनय और वित्तीय क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने साझा किए अपने अनुभव

    15-Feb-2026
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 पुणे, 14 फरवरी (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)

हर पेशे के पीछे संघर्ष, अनुशासन और निरंतर सीखने की एक कहानी होती है. ये सभी व्यक्ति अपने-अपने क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए समाज के प्रति जिम्मेदारी निभा रहे हैं. इनके अनुभव नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शन हैं और यह संदेश देते हैं कि सफलता केवल प्रतिभा से नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प और सतत प्रयास से प्राप्त होती है. इन पेशवरों से दै.आज का आनंद के लिए प्रो.रेणु अग्रवाल ने बातचीत की. प्रस्तुत है, उनकी बातचीत के प्रमुख अंश
 
 प्रो. रेणु अग्रवाल (मो. 8830670849)
 
वकालत के क्षेत्र में काफी बदलाव आया
 
मेरी उम्र 48 वर्ष है और मैं पेशे से वकील हूं. मेरे परिवार में मेरे माता-पिता, पत्नी, एक बेटा और एक बेटी हैं. वकालत के साथ-साथ मुझे क्रिकेट खेलना और विभिन्न प्रकार की किताबें पढ़ना पसंद है. अन्य पेशों की तरह वकालत के क्षेत्र में भी काफी परिवर्तन आया है. डिजिटल युग में ई-फाइलिंग अनिवार्य हो गई है, जो वरिष्ठ वकीलों के लिए कभी-कभी चुनौतीपूर्ण होती है, जबकि युवा वकील इसे सहजता से अपना रहे हैं. वकालत हमें प्रतिदिन जीवन को सही ढंग से जीने की सीख देती है, लेकिन एक सफल वकील बनने के लिए जिद, निरंतर अभ्यास और कड़ी मेहनत आवश्यक है. इस समाचारपत्र के माध्यम से मैं यह संदेश देना चाहता हूं कि जब संसद में अधिक से अधिक शिक्षित लोग पहुंचेंगे तो हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था और मजबूत होगी. प्रत्येक नागरिक को अपने मताधिकार का उपयोग सोच-समझकर करना चाहिए और शिक्षित लोगों को राजनीति में आगे आना चाहिए. - एडवोकेट साहेबराव लबड़े पाटिल, मुकुंदवाड़ी
 

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अभिनय के क्षेत्र में सार्थक भूमिकाओं की तलाश
 
मेरी उम्र 30 वर्ष है और मैं पिछले 14 वर्षों से मुंबई, पुणे और छत्रपति संभाजीनगर में फिल्म और टेलीविजन उद्योग में कार्यरत हूं. मेरे परिवार में माता- पिता और एक छोटी बहन हैं. अभिनय के साथ-साथ मैं विद्यालयों, महाविद्यालयों और संस्थानों में अभिनय प्रशिक्षण भी देता हूं. इस क्षेत्र में शुरुआत के दौरान अनेक कठिनाइयों और अस्वीकार का सामना करना पड़ा, लेकिन निरंतर प्रयास ने मुझे आगे बढ़ाया. अब तक मैं 13 टेलीविजन धारावाहिक, 7 फिल्में, 1 भव्य नाट्य प्रस्तुति, 7 नाटक, 10 एकांकी और 1 वेब श्रृंखला में 37 से अधिक विभिन्न भूमिकाएं निभा चुका हूं. अभिनय मेरे लिए केवल कला नहीं, बल्कि आत्म-खोज की यात्रा है. जो विद्यार्थी इस क्षेत्र में आना चाहते हैं, उन्हें पहले विधिवत प्रशिक्षण लेना चाहिए, जैसे अन्य पेशों में शिक्षा आवश्यक होती है. इस समाचार पत्र के माध्यम से मैं यही कहना चाहता हूं कि किसी भी क्षेत्र में हार न मानें, दृढ़ रहें और प्रयास जारी रखें. मैं आज भी महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं की तलाश में हूं. - आमोद जांदे, छत्रपति संभाजीनगर
 
 
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संपर्क और ज्ञान सफलता की आधारशिला
मेरी उम्र 40 वर्ष है और मैं पुणे में अपने परिवार के साथ रहता हूं. मैं लोन कंसल्टेंट के रूप में कार्य करता हूं और विभिन्न सामाजिक व व्यावसायिक संगठनों से जुड़ा हूं. इस क्षेत्र में अक्सर ग्राहकों को ऋण प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं होती, जिससे कार्य में जटिलताएं आती हैं. जो विद्यार्थी इस क्षेत्र में आना चाहते हैं, उनके लिए मेरा सुझाव है कि संपर्क और जानकारी इस पेशे की सबसे बड़ी पूंजी हैं. इस समाचार पत्र के माध्यम से मैं यह संदेश देना चाहता हूं कि किसी भी क्षेत्र में सफलता की दो प्रमुख कुंजियां हैं संपर्क और ज्ञान. लोगों से जुड़ाव अवसर प्रदान करता है और ज्ञान उन अवसरों को उपलब्धि में बदलने की क्षमता देता है. - नीलेश बागड़िया, पुणे
 

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न्याय के प्रति समर्पण और सुधार जरूरी
मेरी उम्र 43 वर्ष है और मैं पिछले 15 वर्षों से वकालत कर रही हूं. न्यायालय में विभिन्न वर्गों के लोग अपनी समस्याएं लेकर आते हैं. उनकी परिस्थितियों को समझना और प्रमाणों सहित उनका पक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना आसान नहीं होता, लेकिन अनुभव के साथ यह कौशल विकसित होता है. इस समाचार पत्र के माध्यम से मैं यह कहना चाहती हूं कि न्याय व्यवस्था में आवश्यक सुधार होने चाहिए ताकि कानूनी प्रक्रिया सरल और शीघ्र हो सके. इस क्षेत्र में आने वाले विद्यार्थियों को यह समझना चाहिए कि मेहनत ही सफलता का एकमात्र मार्ग है. समाज में बढ़ते अपराध को देखते हुए सभी को सजग और जागरूक रहना चाहिए. - रूपाली किशोरीलाल भूरे, छत्रपति संभाजीनगर
 
 
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सत्य के साथ खड़े रहने की प्रतिबद्धता
मेरी उम्र लगभग 49 वर्ष है और मैं एक शिक्षित व संस्कारित परिवार से हूं. वर्तमान में मैं अधिवक्ता के रूप में कार्यरत हूं और इससे पहले लगभग 20 वर्षों तक पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहा हूं. लेखन और सामाजिक मुद्दों पर विचार प्रस्तुत करना मेरी विशेष रुचि है. कानून के क्षेत्र में सत्य के साथ खड़े रहना सबसे बड़ी चुनौती होती है. कठिन परिस्थितियों में भी मैं तथ्यों और ईमानदारी के आधार पर समाधान खोजने का प्रयास करता हूं. जो विद्यार्थी इस क्षेत्र में आना चाहते हैं, उन्हें धैर्य, अनुशासन और सत्यनिष्ठा को अपना मूलमंत्र बनाना चाहिए. यह केवल पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी है. इस समाचार पत्र के माध्यम से मैं समाज से अपील करता हूं कि अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें, अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाएं और सत्य का साथ कभी न छोड़ें. कानून और कलम आम नागरिक की सबसे बड़ी शक्ति हैं. - एडवोकेट सैयद मोईन, छत्रपति संभाजीनगर
 
 
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वकालत एक नोबल प्रोफेशन
 
मेरी उम्र 40 वर्ष है और मैं पेशे से वकील तथा मीडिएटर हू्‌ँ‍.मीडिएटर के रूप में कार्य करने के अलावा मुझे गाने सुनना और ड्राइविंग करना पसंद है.वकालत के पेशे में कभी- कभी क्लाइंट को उसके केस से जुड़ी कानूनी बातें समझाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है. लेकिन मीडिएशन की ट्रेनिंग लेने के बाद क्लाइंट को बात समझाना काफी आसान हो जाता है. इससे न केवल उन्हें कानूनी प्रक्रिया स्पष्ट रूप से समझ आती है, बल्कि उनका यह वेिशास भी मजबूत होता है कि उनका केस सही वकील लड़ रहा है. यही वेिशास उन्हें जीत की उम्मीद देता है. वकील होना एक नोबल प्रोफेशन है. इसलिए मैं विद्यार्थियों को सलाह दूंगा कि वे अपनी पढ़ाई के दौरान ही इस पेशे की जानकारी लें और उसका अभ्यास करते रहें. इससे भविष्य में जब वे इस प्रोफेशन में आएंगे, तो उन्हें कम कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा. अंत में, मैं यही कहना चाहूंगा कि जो भी काम करें, पूरी मेहनत और ईमानदारी से करें - हेमंत शशिकांत वैद्य, जालान नगर
 

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