तिलक रोड, 14 फरवरी (आ.प्र.) देह से देव (ईेशर) तक की यात्रा के बीच में देश आता है. जो देश के लिए अपना बलिदान देता है, उसे स्वर्ग प्राप्त होता है, ऐसा माना जाता है. इसीलिए, हम ऐसे सैनिकों को नमन करते हैं. भारतीय सेना को ‘रक्षा सेना नहीं बल्कि सशस्त्र सेना कहें, ऐसी राय एयर मार्शल भूषण गोखले (सेवानिवृत्त) ने व्यक्त की. वे शहीद सैनिकों की वीर नारियों के सम्मान समारोह में बोल रहे थे. इस अवसर पर बटालियन के शहीद सैनिकों की 35 वीर पत्नियों और वीर माताओं को सम्मानित किया गया. सम्मान के रूप में प्रत्येक को 25 हजार रुपये, साड़ी-चोली और स्मृति चिन्ह प्रदान किए गए. ‘द महार रेजिमेंट' की 13वीं बटालियन का हीरक जयंती (डायमंड जुबली) समारोह के उपलक्ष्य में यह कार्यक्रम हुआ. श्रीमंत दगडूासेठ हलवाई सार्वजनिक गणपति ट्रस्ट और सुवर्णयुग तरुण मंडल द्वारा एस. पी. कॉलेज के लेडी रमाबाई हॉल में कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस अवसर पर मेजर जनरल बिनॉय पूनेन (सेवानिवृत्त), कर्नल संजीत फुगत (कमांडिंग ऑफिसर, 13 महार रेजिमेंट), वरिष्ठ संपादक अरुण खोरे, सूबेदार मेजर (ऑर्डिनरी कैप्टन) बापू पोलके, लेफ्टिनेंट कर्नल नरेंद्र पाठक, सुनील रासने, (अध्यक्ष, दगडूशेठ गणपति ट्रस्ट), महेश सूर्यवंशी (कोषाध्यक्ष), अमोल केदारी (सह-सचिव), अक्षय गोडसे (उत्सव प्रमुख), प्रकाश चव्हाण (अध्यक्ष, सुवर्णयुग तरुण मंडल) समेत गणमान्य व्यक्ति, पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित थे. अरुण खोरे ने कहा कि भारतीय सेना में ‘महार रेजिमेंट' का बहुत बड़ा योगदान है. सन 1941 में जब ब्रिटिश सरकार ने ‘रक्षा सलाहकार परिषद' का गठन किया था, तब डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर उसके सदस्य थे और उन्होंने इस विषय में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए थे. सुनील रासने ने कहा, सेना से जुड़े किसी भी कार्यक्रम में शामिल होना हमारे लिए हमेशा आनंद और सौभाग्य की बात होती है. हम समाज सेवा करते हैं और एक सैनिक के रूप में आप देश सेवा करते हैं. इन दोनों सेवाओं का एक साथ आना बहुत आवश्यक है. महेश सूर्यवंशी ने कहा कि ट्रस्ट की ओर से यह पहल वर्ष 2011 से चलाई जा रही है. शुरुआत में ‘6 मराठा बटालियन' के सैनिकों की 60 वीर नारियों को सम्मानित किया गया था. इसके बाद, वर्ष 2017 में ट्रस्ट के 125वें वर्ष के अवसर पर 125 वीर नारियों का सम्मान, तथा भारतीय स्वतंत्रता के ‘अमृत महोत्सव' के उपलक्ष्य में 75 वीर नारियों का सम्मान किया गया. भारतीय सैनिकों और उनकी वीर नारियों द्वारा देश के प्रति दिए गए अमूल्य योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए इस सम्मान समारोह का आयोजन किया जाता है.