गुजरात स्थित श्री वामज तीर्थ जैन मंदिर, शेरिसा

    16-Feb-2026
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कवदंती के अनुसार, भगवान की मूर्ति कई वर्षाें तक जमीन के नीचे दबी रही.एक भक्त काे अक्सर सपने में मूर्ति का स्थान दिखाई देता था. सपने के अनुसार, वह उस विशेष स्थान पर गया और मूर्ति की खाेज की. उसे वह जमीन के नीचे पड़ी मिली.इस तीर्थ का उल्लेख कवि लावण्यगानी द्वारा विक्रम संवत सन् 1562 में रचित ‘आलाेयन विनती’ में मिलता है. भगवान की प्रतिमा काे विक्रम संवत सन् 2002 में वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तेरहवीं तिथि काे विजयाेदयसुरिश्वरजी के हाथाें विधिपूर्वक स्थापित किया गया थाऐसा माना जाता है कि भगवान ऋषभ देव की प्रतिमा में चमत्कारी शक्तियां हैं.दूर-दूर से हजाराें जैन और गैर-जैन श्रद्धालु मंदिर में दर्शन करने आते हैं.भगवान आदिनाथ की प्रतिमा वाला श्री वामज तीर्थ मंदिर खूबसूरती से निर्मित है.
 
मंदिर की मूर्तिकला और जटिल नक्काशी प्राचीन कला का अनूठा नमूना है. मंदिर की दीवारें और स्तंभ सुंदर चित्राें और कलात्मक आकृतियाें से सुशाेभित हैं. इस भव्य मंदिर की कारीगरी शिल्पकाराें के काैशल का उत्कृष्ट उदाहरण है. भगवान की प्रतिमा 107 सेंटीमीटर ऊंची और सफेद रंग की है. यह पद्मासन मुद्रा में विराजमान है. प्रतिमा काे एक ही पत्थर से खूबसूरती से तराशा गया है और यह अत्यंत आकर्षक प्रतीत हाेती है.तीर्थयात्रियाें के लिए आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित धर्मशालाएं और विश्रामगृह उपलब्ध हैं. उपाश्रय, आयंबिलशाला और ज्ञानभंडार की सुविधा भी उपलब्ध है. यह क्षेत्र सड़क, रेल और हवाई मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है. यहां टैक्सी और बस सेवाएं आसानी से उपलब्ध हैं.निकटतम बस स्टैंड रेवदार में स्थित है. निकटतम रेलवे स्टेशन कलाेल में है, जाे यहां से 16 किलाेमीटर की दूरी पर ह