पुणे में जैन समाज के सबसे अमीर उद्योगपति अभय फिरोदिया

    17-Feb-2026
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भारत के जाने-माने अरबपति उद्योगपति अभय फिरोदिया फोर्स मोटर्स अध्यक्ष हैं. इस कंपनी की स्थापना उनके स्व. पिता नवलमल फिरोदिया ने साल 1958 में की थी. फिरोदिया का जन्म महाराष्ट्र के पुणे में एक जैन परिवार में हुआ था. अपनी स्कूली शिक्षा उन्होंने मध्य प्रदेश के ग्वालियर से पूरी की. आगे की पढ़ाई के लिए पुणे आकर उन्होंने फग्रेशन कॉलेज में दाखिला लिया और अर्थशास्त्र में स्नातक की डिग्री प्राप्त की.
अभय फिरोदिया का करियर
अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद साल 1995 में वह अपने पिता द्वारा स्थापित फोर्स मोटर्स में काम करने लगे. वह 2009 तक फर्म के प्रबंध निदेशक (चऊ) थे, इसके बाद उन्होंने अपने बेटे प्रसन्न को कारोबार सौंपने का फैसला किया. वह अब कंपनी के अध्यक्ष पद को संभाल रहे हैं. फोर्स मोटर्स वैन, पिकअप ट्रक, डणत, ट्रैक्टर बनाती है और मर्सिडीज-बेंज, इचथ और रोल्स रॉयस जैसी कुछ शानदार कारों के लिए इंजन भी बनाती है.
अभय फिरोदिया की संपत्ति
फोर्ब्स के अनुसार, वर्तमान में फिरोदिया की अनुमानित संपत्ति 27,800 करोड़ रुपये से भी अधिक है. वह वर्तमान में 2023 की अरबपतियों की सूची में 1,104 वें स्थान पर हैं. फोर्स मोटर्स का बाजार पूंजीकरण 4,417 करोड़ रुपये है. फोर्स मोटर्स को पहले बजाज टेंपो के नाम से जाना जाता था जो बजाज परिवार के साथ इसके संयुक्त उद्यम की उत्पत्ति को दर्शाता है. उनकी संपत्ति का बड़ा हिस्सा बजाज ऑटो समेत विभिन्न बजाज कंपनियों में हिस्सेदारी से आता है. फोर्स मोटर्स के अध्यक्ष के साथ-साथ वह ऑटो पार्ट्स फॉर्म जया हिंद इंडस्ट्रीज के भी प्रमुख हैं. अभय फिरोदिया, वैन, पिकअप ट्रक, एसयूवी और ट्रैक्टर बनाने वाली कंपनी फोर्स मोटर्स और निजी स्वामित्व वाली ऑटो पार्ट्स फर्म जया हिंद इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष हैं, जिससे उनकी अधिकांश संपत्ति प्राप्त हुई है. फोर्स मोटर्स, जिसे पहले बजाज परिवार के साथ संयुक्त उद्यम होने के दौरान बजाज टेम्पो के नाम से जाना जाता था, का संचालन 2009 से उनके बेटे प्रसन द्वारा किया जा रहा है. इसकी स्थापना उनके स्व. पिता नवलमल फिरोदिया ने 1958 में की थी, जिनका बजाज परिवार के साथ 1968 में एक कड़वे विवाद के बाद संबंध टूट गया था. फ्रांसीसी ऑटो पार्ट्स फर्म मोंटुपेट के साथ संयुक्त उद्यम करने वाली जया हिंद इंडस्ट्रीज ऑटो सेक्टर के लिए एल्युमीनियम की ढलाई करती है.
ऐसी है फोर्स मोटर्स की स्थिति
 फोर्स मोटर्स के एक शेयर की कीमत इस समय 8290 रुपये है. पिछले 6 महीने में कंपनी ने निवेशकों को 45 फीसदी का मुनाफा दिया है. वहीं एक साल का रिटर्न करीब 137 फीसदी है. यानी कंपनी ने एक साल में निवेशकों का पैसा दोगुने से काफी ज्यादा कर दिया है. फोर्स मोटर्स ने कुछ समय पहले चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के नतीजे पेश किए थे. इसमें कंपनी को तिमाही के आधार पर 69 फीसदी का फायदा हुआ है. फोर्स मोटर्स के चेयरमैन अभय फिरोदिया ने अपनी संस्था में जर्मन कार्यशैली को अपनाया है. अभयकुमार फिरोदिया से मिलने का अनुरोध करें और आपको कुछ ही घंटों में जवाब मिल जाएगा. सटीक समय बताया जाता है. पुणे के बाहरी इलाके में स्थित औद्योगिक क्षेत्र पिंपरी-चिंचवाड़ में उनके कार्यालय का पता संक्षिप्त और सटीक है. वहां पहुंचने पर, बैठकें समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ती हैं. फिरोदिया परिवार का देश के ऑटोमोबाइल इतिहास में एक विशिष्ट स्थान है. उन्होंने कई ऐसे नवाचारों का नेतृत्व किया जो यात्रा के लिए अनिवार्य बन गए. उदाहरण के लिए, पिता नवलमल कुंदनमल फिरोदिया ने 1947 में भारत में पहली ऑटो रिक्शा निर्माण इकाई स्थापित की थी. परिवार ने टेम्पो, तीन पहिया मालवाहक वाहन मैटाडोर, लूना और होंडा मोटर कंपनी के सहयोग से काइनेटिक इंजीनियरिंग द्वारा निर्मित स्कूटर भी पेश किए. (1990 के दशक में, टाटा नैनो के आने से पहले, अभय के चचेरे भाई अरुण, जो अब काइनेटिक इंजीनियरिंग को एक अलग इकाई के रूप में चलाते हैं, 1 लाख रुपये की कार लॉन्च करना चाहते थे, लेकिन मौजूदा कर संरचना के कारण यह संभव नहीं हो पाया.) लूना और काइनेटिक स्कूटर दोनों का उत्पादन अब बंद हो चुका है.
फोर्स मोटर्स के संचालक प्रसन फिरोदिया
आज फोर्स मोटर्स का संचालन उनके 37 वर्षीय बेटे प्रसन कर रहे हैं, जो प्रबंध निदेशक हैं. यह फिरोदिया साम्राज्य की एकमात्र सूचीबद्ध कंपनी है और पिछले दो वर्षों में इसका बाजार पूंजीकरण तीन गुना बढ़कर 5,110 करोड़ रुपये हो गया है. निजी स्वामित्व वाली ‌‘जया हिंद इंडस्ट्रीज' का ऑटो कंपोनेंट्स का एक बड़ा और फलता-फूलता कारोबार है. इसके अलावा, फिरोदिया परिवार की बजाज परिवार (17वें स्थान पर) द्वारा संचालित विभिन्न कंपनियों में भी हिस्सेदारी है. उदाहरण के लिए, बजाज ऑटो और बजाज फिनसर्व, जिनके मूल्यांकन में भी पिछले वर्ष तेजी से वृद्धि हुई है. परिणामस्वरूप 1.85 अरब डॉलर की कुल संपत्ति के साथ, अभय फिरोदिया 2016 की फोर्ब्स इंडिया रिच लिस्ट में 18 स्थान ऊपर चढ़कर 70वें स्थान पर पहुंच गए हैं.
ऑटो रिक्शा का निर्माण
टाइपराइटर आयात और बिक्री से संतुष्ट न होकर उत्साही फिरोदिया सीनियर ने तीन पहियों वाले यात्री वाहन का विचार पेश किया. वे यूरोप में बेकरियों या फूलों की दुकानों तक सामान पहुंचाने के लिए इस्तेमाल होने वाले तीन पहियों वाले मालवाहक वाहनों से प्रेरित थे और उन्होंने (सही ही) सोचा कि वे इस विचार को यात्री वाहन में बदल सकते हैं. 1947 में फिरोदिया परिवार की ‌‘जया हिंद इंडस्ट्रीज' और जमनालाल संस (बजाज परिवार) के बीच ‌‘बचराज ट्रेडिंग कॉर्पो रेशन' के माध्यम से एक संयुक्त उद्यम (जेवी) का गठन किया गया, ताकि आज सर्वव्यापी ऑटो रिक्शा का निर्माण किया जा सके. फिरोदिया कहते हैं, व्यापार मॉडल के संदर्भ में, संचालक, सरकार या यात्री, किसी के भी दृष्टिकोण से कोई विरोधाभास नहीं था. यह संयुक्त उद्यम अंततः बजाज ऑटो में परिवर्तित हो गया और अब इसका संचालन बजाज परिवार द्वारा किया जाता है. हालांकि उनका अपना परिवार अब ऑटो रिक्शा का निर्माण नहीं करता, फिरोदिया को इस बात पर बहुत गर्व है कि यह वाहन उनके पिता का आविष्कार था और इसका कारण भी स्पष्ट है: लगभग 60 वर्षों बाद, भारत भर में लाखों ऑटो रिक्शा चल रहे हैं, और फिरोदिया परिवार का यह योगदान समय की कसौटी पर खरा उतरा है.
1957 में फिरोदिया टेम्पो की स्थापना
उस समय, हालांकि एन. के. फिरोदिया ऑटो रिक्शा व्यवसाय स्थापित करने में पूरी तरह से जुट चुके थे, फिर भी उन्हें इससे संतोष नहीं हुआ. उन्होंने 1957 में फिरोदिया टेम्पो की स्थापना की. यह जर्मनी की विडाल एंड संस टेम्पो वर्क्स के साथ एक संयुक्त उद्यम था, जिसका उद्देश्य टेम्पो हंसेट नामक तीन पहिया मालवाहक वाहन का निर्माण करना था. फिरोदिया याद करते हुए बताते हैं, वे बैलगाड़ी का विकल्प चाहते थे. फिर 1958 में, विडाल एंड संस टेम्पो वर्क्स, फिरोदिया परिवार और बजाज परिवार के साथ एक त्रिपक्षीय समझौता हुआ. इस संयुक्त उद्यम का नाम बजाज टेम्पो कंपनी रखा गया और इसने मुंबई के गोरेगांव से टेम्पो का निर्माण शुरू किया. (ये दोनों संयुक्त उद्यम अंततः विलय हो गए और 2005 में फोर्स मोटर्स बन गए).
 
 
 विदेशी कारों का इंजिन ‌‘फोर्स मोटर्स' बनाती है

आपने इचथ, रोल्स-रॉयस और मर्सिडीज बेंज जैसी विदेशी कारों के नाम सुने होंगे. ये कारें इतनी महंगी होती हैं कि आम आदमी के लिए इन्हें खरीदना एक सपने जैसा होता है. आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इन विदेशी कारों का इंजन कोई विदेशी कंपनी नहीं, बल्कि भारत की कंपनी फोर्स मोटर्स (Force Motors) बनाती है. वही फोर्स मोटर्स जो वैन, पिकअप ट्रक, एसयूवी आदि वाहन बनाती है. कंपनी के चेयरमैन अभय फिरोदिया हैं. अमीरी के मामले में भी 79 साल के अभय फिरोदिया पुणे की जैन समाज में सबसे आगे हैं.