बैंक के बचत खाताें में न्यूनतम शेष राशि (मिनिमम बैलेंस) न रखने के कारण सामान्य खाताधारकाें काे भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. पिछले पांच वर्षाें में, सार्वजनिक और निजी बैंकाें ने खाताें में न्यूनतम राशि बनाए न रखने पर ग्राहकाें से 11,000 कराेड़ रुपये से अधिक की वसूली की है.विशेष बात यह है कि कई ग्राहकाें काे इसकी जानकारी तक नहीं हाेती. इसे आम ग्राहकाें पर एक अतिरिक्त बाेझ बताते हुए, लाेकसभा याचिका समिति ने इस जुर्माने काे रद्द करने और बैंकिंग शुल्क प्रणाली काे अधिक पारदर्शी व ग्राहक-अनुकूल बनाने की सिफारिश की है. समिति ने कहा है कि ग्राहकाें की शिकायताें का समाधान तीन दिनाें के भीतर किया जाना चाहिए.साथ ही, एसएमएस और फाेन के माध्यम से शिकायत दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध हाेनी चाहिए. यह भी ध्यान में आया है कि निजी बैंकाें ने जुर्माना वसूलने का काेई पिछला रिकाॅर्ड दर्ज नहीं किया है. वित्तीय वर्ष 2024-25 में, इन बैंकाें ने 2,772.21 कराेड़ रुपये वसूले हैं.