भांडारकर संस्था द्वारा ‘ज्ञानसागर’ प्रदर्शनी का आयाेजन

    18-Feb-2026
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exhibition 
 
भांडारकर प्राच्यविद्या संशाेधन मंदिर संस्था द्वारा, मैन्युस्क्रिप्ट (पांडुलिपि), प्राचीन ग्रंथ और मूल्यवान वस्तुं और अनुसंधान परियाेजनाओं के बारे में आधारित ‘ज्ञानसागर’ प्रदर्शनी का आयाेजन 21 से 23 फरवरी तक किया गया है. 108 वर्षाें से कार्यरत भांडारकर प्राच्यविद्या संशाेधन मंदिर संस्था के बारे में लाेगाें के जानकारी हाे और शाेधकर्ता भी आगे आकर अनुसंधान में अपनी उत्सुकता दिखाए, यही इस प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य है.भांडारकर प्राच्यविद्या संशाेधन मंदिर संस्था के कार्यकारी मंडल के अध्यक्ष भूपाल पटवर्धन, मानद सचिव सुधीर वैशंपायन, सदस्य संताेष रासकर, मनाेज एरंडे,भालचंद्र कुलकर्णी, श्रीनंद बापट और अन्य सदस्याें ने मंगलवार (17 फरवरी) काे दाेपहर 4 बजे आयाेजित पत्रकार वार्ता में प्रदर्शनी के बारे में जानकारी दी.
 
शनिवार (21 फरवरी) काे सुबह 10 बजे महापाैर मंजूषा नागपुरे द्वारा प्रदर्शनीका उद्घाटन हाेगा. नेमबाज अंजली भागवत, संस्था के नियामक परिषद के अध्यक्ष अभय फिराेदिया उपस्थित रहेंगे.इस प्रदर्शनी काे प्रा. रवींद्र कुलकर्णी का विशेष सहयाेग मिला है. यह प्रदर्शनी सुबह 10 से रात 8 बजे तक लाेगाें के लिए मुफ्त खुली रहेगी. ‘ज्ञानसागर’ प्रदर्शनी में ‘भीम’ किताब का प्रकाशन वरिष्ठ वैज्ञानिक डाॅ.स्मिता लेले के करकमलाें द्वारा हाेगा.प्रदर्शनी में 14 स्टाॅल्स हाेंगे. इन स्टाॅल पर विभिन्न ग्रंथ, पांडुलिपि और ऐतिहासिक जानकारी उपलब्ध करायी जाएगी.पत्रकार वार्ता में भूपाल पटवर्धन ने बताया कि, भारत की सांस्कृतिक विरासत इस प्रदर्शनी में प्रदर्शित हाेगी. प्राकृत भाषा की ड्निशनरी भी संस्था प्रकाशित करनेवाली है. यूनेस्काे की मेमरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर में उल्लेखित पांडुलिपि, भारत और विदेशी भाषांओं में लिखे गए प्राचीन ग्रंथ भी देखने काे मिलेंगे. र्ीं