दूध का तीन में से एक सैंपल जांच में फेल

बड़े ब्रांड भी संदेह के घेरे में, देश में बढ़ते उत्पादन के साथ ही मिलावट के मामले भी बढ़ रह

    23-Feb-2026
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FSSAI
 
नई दिल्ली, 22 फरवरी (वि.प्र.) भारत दुनिया में दूध का सबसे बड़ा उत्पादक (करीब 25% हिस्सा) है और दुर्भाग्य से, मिलावटी दूध के मामलाें में भी सबसे आगे है. हाल के वर्षाें में देशभर में जांचे गए दूध के हर तीन नमूनाें में से एक गुणवत्ता जांच में विफल रहा है. भारतीय खाद्य संरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) द्वारा वित्त वर्ष 2025 में 38% नमूने मिलावटी पाए गए.
 
एफएसएसएआई की रिपाेर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2015 और वित्त वर्ष 2018 के बीच मिलावटी दूध के नमूनाें की संख्या 16.64 प्रतिशत अंक तक बढ़ गई. वित्त वर्ष 2022 में 798 नमूनाें में से आधे मिलावटी पाए गए, जाे वित्त वर्ष 2015 के बाद से मिलावट की उच्चतम दर है. वहीं करीब सप्ताह भर पहले ट्रस्टिफाइड नाम के एक स्वतंत्र टेस्टिंग प्लेटफाॅर्म की रिपाेर्ट में दावा किया गया है कि देश के कुछ प्रतिष्ठित ब्रांड के पैकेज्ड दूध में काेलिफाॅर्म नामक हानिकारक बैक्टीरिया तय सीमा से 98 गुना तक अधिक पाया गया. इस रिपाेर्ट ने पैकेज्ड फूड सेफ्टी पर भी चिंता बढ़ा दी है. सरकारी आंकड़ाें के मुताबिक 2025 में देश में दूध उत्पादन 24.8 कराेड़ टन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया. पिछले 11 वर्षाें में इसमें 69.4% की वृद्धि देखने काे मिली है. देश में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता प्रतिदिन 485 ग्राम के रिकाॅर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गई. जबकि वैश्विक औसत करीब 328 ग्राम है. सरकार की एक अन्य रिपाेर्ट के अनुसार, भारत दुनिया में दूध उत्पादन में प्रथम स्थान पर है और वैश्विक दूध उत्पादन में इसका याेगदान 25% है. दिल्ली के श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट के इंटरनल मेडिसिन एंड इन्फेक्शियस डिजीज विभाग के डायरेक्टर डाॅ. अरविंद अग्रवाल के मुताबिक, हमेशा भराेसेमंद साेर्स से दूध खरीदें और पैकिंग, एक्सपायरी डेट पर ध्यान दें. दूध काे साफ बर्तन में अच्छी तरह उबालें. गर्म करने से अधिकांश हानिकारक बैक्टीरिया नष्ट हाे जाते हैं. उबालने के बाद ढककर या फ्रिज में रखें.