आयुर्वेद के अनुसार तेल मालिश की फायदेमंद विधि काे जानिए

04 Feb 2026 22:10:26
 

Health 
 
मालिश के लिए आयुर्वेद में मालिश शब्द का प्रयाेग किया गया है. शरीर काे अनुकूल तेल से सुखपूर्वक धीरे-धीरे अनुलाेम गति से मलना मालिश है.भाेजन के तीन घण्टे बाद, जब समय मिले तब, रात्रि अथवा दिन में जब अनुकूल हाे मालिश की जा सकती है.मालिश की शुरुआत भी सर्वप्रथम पैराें से करनी चाहिए तथा अन्त में सिर पर पहुँचकर समाप्त करनी चाहिए. इसकाआशय यह नहीं कि पैर से सिर तक एक साथ हाथ घुमा दिया जाय. नहीं. पैर के तलुओं एवं उँगली से एड़ी तक, िफर पैर के पंजाें से घुटने तक, घुटने से जाँघाें एवं कमर तक, हाथ की उँगलियाें तथा हथेलियाें से लेकर कंधे तक, पेट की, छाती की, चेहरे एवं सिर की, गर्दन एवं कमर की, इस क्रम से मालिश करनी चाहिए. सिर, पाँव और कान में मालिश विशेषतः करना चाहिए. सिर में मालिश के लिए शीत तेल या सुखाेष्ण तेल का उपयाेग करें.
 
हाथ-पैर आदि अवयवाें पर गरम तेल से मालिश करें. इसी तरह शीत ऋतु में गरम तेल से ग्रीष्म ऋतु में शीत तेल से मालिश करना उचित है. दीर्घाकारवाले अवयवाें-हाथपैर पर अनुलाेमतः अर्थात् ऊपर से नीचे की ओर, संधिस्थान में कर्पूर एवं जानु, गुल्फ, कटि में वर्तुलाकार मालिश करें.मालिश का मुख्य उद्देश्य भीतर के अवयवाें की गतियाें काे उत्तेजित करना है.शरीर के सभी अंगाें पर एक समान दबाव से मालिश नहीं करनी चाहिए. आँख, नाक, कान, गला, मस्तक व पेट जैसे काेमल अंगाें पर हल्के हाथाें से तथा शेष समस्त अवयवाें पर आवश्यक दबाव के साथ मालिश करनी चाहिए. शीघ्रता से की गई मालिश शरीर में थकान पैदा करती है अतः मालिश करते समय शीघ्रता न करें तथा निश्चिंतता व प्रसन्नतापूर्वक यह साेचते हुए आराम से तालबद्ध मालिश करें कि मेरे शरीर में एक नई चेतना व स्ूर्ति का संचार हाे रहा है.
Powered By Sangraha 9.0