मेरा पुणे आना ‌‘भाषा अभियान' की एक कड़ी : अनिल जोशी

04 Feb 2026 15:01:20
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पुणे, 3 फरवरी (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)

वैेिशक हिंदी परिवार, नई दिल्ली के अध्यक्ष अनिल जोशी ने कहा कि युवाओं को भारतीय भाषाओं से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है और इसमें प्रौद्योगिकी की निर्णायक भूमिका है. वे तृतीय अंतरराष्ट्रीय भाषा सम्मेलन, नई दिल्ली के सफल आयोजन के बाद पुणे के साहित्यकारों से संवाद करने और आगामी योजनाओं की जानकारी देने पुणे आए थे. महाराष्ट्र राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के बाजीराव रोड स्थित सभागार में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक मिशन है. मेरा पुणे आना इसी व्यापक भाषा अभियान की एक कड़ी है. उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे ही भविष्य हैं और भारतीय भाषाओं का एक सशक्त थिंक टैंक बनाया जाना चाहिए, जिसमें युवाओं और तकनीक की केंद्रीय भूमिका हो. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महाराष्ट्र राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के कार्याध्यक्ष डॉ. सुनील देवधर रहे. उन्होंने समिति के कार्यों की जानकारी देने के साथ बड़े अनमोल गीतों के बोल की रचना प्रक्रिया साझा की. उन्होंने कहा कि पुराने गीतों की लय अब धीरे-धीरे लुप्त हो रही है. उन्होंने अपने द्वारा किए गए छंदबद्ध गीतों के अनुवाद पर भी प्रकाश डाला और कहा कि युवाओं से उनकी भाषा में संवाद करते हुए उन्हें साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना हमारी जिम्मेदारी है. वैेिशक हिंदी परिवार की प्रांत संयोजक स्वरांगी साने ने युवाओं के लिए आयोजित ऑनलाइन हिंदी प्रतियोगिता की जानकारी दी, जिसमें देशभर के गैरहिंदी प्रदेशों से पांच हजार से अधिक युवाओं ने भाग लिया. मॉडर्न कॉलेज की हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रेरणा उबाले ने कॉलेज में हिंदी गतिविधियों और हिंदी- मराठी अनुवाद कार्य पर प्रकाश डाला. व्यंग्य लेखिका समीक्षा तेलंग ने अपनी लेखन यात्रा साझा की. भाषाविद्‌‍ डॉ. सुमित पॉल ने कहा कि कोई भी व्यक्ति किसी भाषा को पूर्णतः जानने का दावा नहीं कर सकता. एसएनडीटी कॉलेज के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. शिवदत्त वावलेकर ने शोध कार्यों की जानकारी देते हुए भाषाओं के बीच अनुवाद की आवश्यकता बताई. सहायक प्राध्यापिका सुप्रिया शिंदे, डॉ. मंजू चोपड़ा, दीप्ति पेठे और मॉडर्न जूनियर कॉलेज की प्राध्यापिका अनिता जठार ने भी अपने विचार रखे. कार्यक्रम में अशोक भांबुरे, रिचा मोहबे, स्वाति जोशी, स्नेहसुधा कुलकर्णी और उषा सिंह सहित अनेक साहित्यकारों ने अपनी रचनाए प्रस्तुत कीं.
 
 
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