सुप्रीम काेर्ट ने व्हाट्सएप काे कड़ी फटकार लगायी

04 Feb 2026 22:24:04
 
 
SC
 
व्हाट्सएप और मेटा की प्राइवेसी पाॅलिसी (निजता नीति) मामले में सुनवाई के दाैरान सुप्रीम काेर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है.सीजेआई सूर्यकांत ने मेटा से स्पष्ट शब्दाें में कहा कि देश के नागरिकाें की निजता से किसी भी कीमत पर समझाैता नहीं किया जाएगा. उन्हाेंने चेतावनी दी कि यदि काेई कंपनी देश के संविधान और कानूनाें का पालन नहीं कर पाती, ताे उसके लिए विकल्प स्पष्ट हैं.भारत से निकल जाएं.सुप्रीम काेर्ट ने साफ किया कि निजता का अधिकार काेई विकल्प नहीं, बल्कि संविधान द्वारा दिया गया एक माैलिक अधिकार है. हालांकि, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयाेग के वकील ने एनसीएलएटी के कुछ निष्कर्षाें पर आपत्ति जताई है. व्हाट्सएप की नीति पर सवाल उठाते हुए सीजेआइने कहा, आपने इसे इतनी चालाकी से तैयार किया है कि इसे समझना लगभग नामुमकिन है. क्या देश का आम आदमीजैसे घरेलू सहायक, निर्माण मजदूर या छाेटे विक्रेता-इस जटिल नीति काे समझ पाएंगे?
 
उपभाेक्ताओं काे इस ऐप की ऐसी लत लगा दी गई है कि अब उनकी मजबूरी का फायदा उठाया जा रहा है.इस मामले में सुप्रीम काेर्ट के सामने मेटा, व्हाट्सएप और सीसीआई द्वारा दायर तीन मुख्य अपीलें थीं. वरिष्ठ वकील मुकुल राेहतगी ने इन अपीलाें पर पक्ष रखा. मेटा के वकील ने दलील दी कि काेर्ट के आदेशानुसार, 213 कराेड़ रुपए के जुर्माने का भुगतान पहले ही किया जा चुका है. सुनवाई के दाैरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि व्यावसायिक लाभ के लिए लाेगाें के डेटा का इस्तेमाल किया जा रहा है और अब तक लाखाें यूजर्स के डेटा का दुरुपयाेग हाे चुका है. इस पर मेटा के वकील अखिल सिबल ने तर्क दिया कि व्यावसायिक उद्देश्याें के लिए सीमित डेटा शेयरिंग की अनुमति है.सीजेआई ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, यदि आपकाे डेटा का काेई भी हिस्सा बेचने लायक लगेगा, ताे आप उसे बेच देंगे. सिर्फ इसलिए कि भारतीय उपभाेक्ता शांत हैं और उनके पास आवाज नहीं है, आप उन्हें शिकार नहीं बना सकते.
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