बिबवेवाड़ी, 3 फरवरी (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) प्रवासी राजस्थानी सुथार समाज द्वारा भगवान श्री विश्वकर्मा जयंती महोत्सव अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और भव्यता के साथ मनाया गया. श्री वेिशकर्मा राजस्थानी सुथार समाज ट्रस्ट, बिबवेवाड़ी, पुणे के तत्वावधान में आयोजित यह 27वां जयंती महोत्सव महंत श्री प्रेमारामजी महाराज (प्रभु प्रेम गौधाम, जेलू गगाड़ी, जोधपुर) एवं स्वामी श्री मदनपुरी जी महाराज (बस्तवा) के पावन सानिध्य तथा समस्त साधु-संतों की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ. कार्यक्रम की अध्यक्षता ट्रस्ट अध्यक्ष नरपतरामजी मंगलराव ने की. इस अवसर पर ट्रस्ट की कोर कमेटी अध्यक्ष बाबूराम बामणियां, उपाध्यक्ष मोहनलाल पाखरवढ, सचिव नखताराम कुलरिया, कोषाध्यक्ष, चेनाराम मंगलाव, उपाध्यक्ष, मोहनलाल लोढ़ा, नेमीचंदजी कुलरिया सहित ट्रस्ट की संपूर्ण कोर कमेटी एवं कार्यकारिणी समिति के सदस्य उपस्थित रहे. इसके साथ ही समाज के वरिष्ठजन, युवा शक्ति, माताएं-बहनें एवं बच्चे बड़ी संख्या में कार्यक्रम में सहभागी बने. कार्यक्रम के शुभारंभ में ट्रस्ट की ओर से महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित दादा पवार को श्रद्धांजलि अर्पित की गई्. इसके पश्चात आयोजित भजन संध्या में जोधपुर से पधारे प्रसिद्ध भजन गायक प्रकाशजी सुथार ने गणेश वंदना एवं भगवान श्री वेिशकर्मा जी के सुमधुर भजनों की प्रस्तुति देकर पंडाल में उपस्थित सभी समाजबंधुओं को भावविभोर कर दिया. भजन संध्या के उपरांत समाजबंधुओं द्वारा पारंपरिक बोलियों के कार्यक्रम में बढ़- चढ़कर भाग लिया गया. 31 जनवरी को प्रातः मंदिर प्रांगण में हवन कुंड पर पंडितजी द्वारा विधिवत मंत्रोच्चार के साथ विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुआ्. इस अवसर पर 11 जोड़ों ने सामूहिक रूप से हवन में आहुतियां अर्पित कीं. तत्पश्चात भगवान श्री वेिशकर्मा जी का दीप प्रज्वलन, कलश स्थापना, अभिषेक, पोशाक, तिलक, पुष्पहार अर्पण, ध्वजा चढ़ाना, भोग एवं विधिवत आरती व पूजा-अर्चना की गई जयंती महोत्सव में पधारे सभी अतिथियों, व्यापारीगण, समाजसेवियों, जनप्रतिनिधियों एवं प्रत्येक आगंतुक का ट्रस्ट की ओर से साफा, शॉल, श्रीफल एवं सम्मान चिन्ह प्रदान कर सम्मान किया गया. इस अवसर पर समाज की प्रतिभाशाली बेटी नीतू पेंपाराम भुंदड़ (बालेसर) ने अपने हाथों से निर्मित भगवान श्री वेिशकर्मा जी की सुंदर प्रतिमा ट्रस्ट को भेंट की. इस सराहनीय योगदान के लिए ट्रस्ट की ओर से नीतू का विशेष रूप से सम्मान किया गया. कार्यक्रम की सफलता में समाज के भामाशाहों का विशेष योगदान रहा. सभी समाजबंधुओं ने तन-मन-धन से सहयोग कर वरिष्ठजनों के मार्गदर्शन में इस भव्य पर्व को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाया.