केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने साेमवार, 2 फरवरी काे लाेकसभा काे बताया कि शहरी स्थानीय निकायाें ने सड़क की धूल काे कंट्राेल करने के लिए 7,094.39 कराेड़ खर्च किया है. कुल 130 शहर एनसीपी (नेशनल क्लीन एयर प्राेग्राम) के दायरे में आते हैं, जिनमें से 48 मिलियन-प्लस शहराें काे 15वें वित्त आयाेग के मिलियन-प्लस सिटीज चैलेंज फंड से फंडिंग मिलती है. इसके अलावा बचे 82 शहराें काे चे EFCC की प्रदूषण नियंत्रण याेजना से फंडिंग मिली है. केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने एक लिखित जवाब में संसद में बताया कि अब तक एनसीपी (नेशनल क्लीन एयर प्राेग्राम) के तहत कुल 13,852.22 कराेड़ जारी किए गए हैं, जिसमें से सड़क की धूल के मैनेजमेंट पर सबसे बड़ा हिस्सा खर्च हुआ है. केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने यह जानकारी शिवसेना सांसदाें एकनाथ शिंदे और रविंद्र वायकर के तीन सवालाें के जवाब में दी.
जवाब में कहा गया है कि एनसीपी के तहत शहराें में किए गए साेर्स अपाेर्शनमेंट स्टडीज़ के नतीजाें से पता चला है कि सड़क की धूल प्रदूषण में सबसे बड़ा याेगदान देती है और पीएम 10 कंसंट्रेशन में 20-60% हिस्सा इसी का हाेता है. इसी वजह से सिटी एक्शन प्लान में मैकेनिकल स्वीपिंग, पानी का छिड़काव और कंस्ट्रक्शन कंट्राेल पर सबसे ज्यादा फाेकस किया गया. मंत्री के द्वारा जवाब में इस बात का जिक्र भी किया गया है कि एनसीपी के तहत किए गए साेर्स अपाेर्शनमेंट स्टडी से यह पता चला है कि शहरी इलाकाें में हवा काे जहरीली बनाने में सड़क की धूल बड़ी भूमिका निभाती है. यह पीएम10 (पार्टिकुलेट मैटर) कंसंट्रेशन में 20% से 60% तक हिस्सा रखती है. इसी काे देखते हुए सिटी एक्शन प्लान में सड़क की सफाई के लिए मशीनाें के उपयाेग, पानी के छिड़काव और निर्माण गतिविधियाें पर कंट्राेल जैसे उपायाें पर जाेर दिया गया है. सरकार की तरफ से जारी आंकड़ाें के मुताबिक, 2017-18 के मुकाबले 2024-25 में 103 शहराें में पीएम 10 के स्तर में सुधार हुआ है.