हमें हवा शुद्ध चाहिए, भाेजन शुद्ध चाहिए और पानी शुद्ध चाहिए, ताे हिंदी शुद्ध क्याें नहीं चाहिए? हम हिंदी काे देवनागरी के बजाय राेमन में क्याें लिखते हैं? यह सीधा सवाल अंतरराष्ट्रीय हिंदी केंद्र, रवींद्रनाथ टैगाेर विश्वविद्यालय के निदेशक जवाहर कर्नावट ने श्राेताओं से किया.वे शुक्रवार (6 मार्च) काे पुणे में आयाेजित हिंदी भाषा लाेकल से ग्लाेबल विषय पर आयाेजित व्याख्यान में मुख्य वक्ता के रूप में बाेल रहे थे. कार्यक्रम का आयाेजन माॅर्डन कला, विज्ञान और वाणिज्य महाविद्यालय (स्वायत्त) तथा महाराष्ट्र राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के तत्वावधान में वैश्विक हिंदी परिवार (पुणे) द्वारा किया गया. काॅलेज के शिवाजीनगर परिसर में आयाेजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या मश्राेता और विद्यार्थी उपस्थित थे.
वैश्विक हिंदी परिवार की प्रांत संयाेजक स्वरांगी साने ने बताया कि संस्था की ओर से देशभर में मातृभाषा दिवस के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम आयाेजित किए जा रहे हैं.उसी श्रृंखला में पुणे में व्याख्यान और युवा रचना पाठ का आयाेजन किया गया.इस अवसर पर युवा रचनाकाराें ने कुमाऊंनी, कश्मीरी, तमिल, मराठी और हिंदी सहित विभिन्न भारतीय भाषाओं में कविता पाठ किया. युवा कवियाें में मुकेश रावत, साक्षी कांबले, याेगेश काले, विद्या सराफ, कश्मीरी छात्र शाहिद, माेहम्मद उस्मान तथा श्रीलंका की छात्रा सुदर्शना काे विशेष सराहना मिली.
कार्यक्रम की प्रस्तावना समिति केकार्याध्यक्ष डाॅ. सुनील देवधर ने की. उन्हाेंने कहा कि इजराइयल में लगभग 40 भाषाओं का मिश्रण था, लेकिन जब वहां हिब्रू काे अनिवार्य किया गया ताे मृतप्राय हाे चुकी भाषा फिर से जीवित हाे गई.महाविद्यालय की हिंदी विभागाध्यक्ष डाॅ. प्रेरणा उबाले ने विभाग की गतिविधियाें की जानकारी दी और कार्यक्रम का संचालन भी किया.कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डाॅ. दामाेदर खड़से ने की, जबकि प्रवासी रचनाकार डाॅ. नीलम जैन का सान्निध्य प्राप्त हुआ.इस अवसर पर कथाकार डाॅ. राजेंद्र श्रीवास्तव, डाॅ. रमेश मिलन, सुमित पाॅल, सुप्रिया शेरे, ममता जैन, लतिका जाधव, मंजू चाेपड़ा, अनूप अकेला, हितेश व्यास, अनिता जठार और सूरज बिरादर सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे.