पुणे मंडल द्वारा आयाेजित तीन दिवसीय दिव्य भक्ति सत्संग महाेत्सव का समापन गुरुमंत्र दीक्षा, नागरिक अभिनंदन, फूलाें की हाेली और महाआरती के साथ श्रद्धा व भक्ति के वातावरण में संपन्न हुआ. समापन सत्र में परम पूज्य गुरुदेव सुधांशु जी महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं काे संबाेधित करते हुए जीवन में अच्छी सेहत काे सबसे बेशकीमती बताया.उन्हाेंने कहा कि मनुष्य काे अपनी ऊर्जा का उपयाेग सही दिशा में करना चाहिए. यदि हर रूप में हमारा संवाद भगवान से हाेने लगे ताे निश्चित रूप से उनकी कृपा प्राप्त हाेती है. उन्हाेंने कहा कि मैं जिसका जिक्र करता हूं, वह मेरी फिक्र करता है, अर्थात भगवान का स्मरण करने वाला व्यक्ति सदैव उनकी कृपा का पात्र बनता है.
गुरुदेव ने आगे कहा कि भक्ति में प्रेम का हाेना अत्यंत आवश्यक है, क्याेंकि प्रेम ऐसी भावना है जिसकी काेई कीमत नहीं हाेती. उन्हाेंने श्रद्धालुओं काे भगवान के समीप जाने से पहले मन और विचाराें काे शुद्ध रखने का संदेश देते हुए कहा कि पवित्रता से किए गए सभी कार्य सफल हाेते हैं.कार्यक्रम में रंग पंचमी के पावन अवसर पर देवताओं की हाेली के रूप में फूलाें की हाेली खेली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया.पूरे परिसर में भक्ति गीताें और जयकाराें के बीच आध्यात्मिक वातावरण बना रहा.समापन अवसर पर पुणे मंडल के पदाधिकारियाें और गुरु भक्ताें का नागरिक अभिनंदन भी किया गया. अंत में महाआरती के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ. इस अवसर पर सुधांशु जी महाराज ने पुणे मंडल के सभी पदाधिकारियाें और भक्ताें काे कार्यक्रम के सफल आयाेजन के लिए बधाई देते हुए सभी के लिए मंगलकामनाएं व्यक्त कीं.