वाहनचालकाें से बकाया ई-चालान का जुर्माना भरवाने के लिए किसी भी प्रकार की जबरदस्ती नहीं की जानी चाहिए. यदि ऐसा किया गया ताे संबंधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.राज्य के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ने ट्रैफिक पुलिस काे इस संबंध में स्पष्ट आदेश दिए हैं.साथ ही वाहन चालकाें के साथ शालीनता और साैजन्य से व्यवहार करने के निर्देश भी दिए गए हैं.अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (यातायात) ने 4 मार्च काे जारी परिपत्र में स्पष्ट किया है कि बकाया जुर्माना न भरने की स्थिति में वाहन जब्त करने का अधिकार केवल न्यायालय काे है. इस संबंध में महाराष्ट्र के सभी यातायात आयुक्तालयाें काे निर्देश भेजे गए हैं.ई-चालान और उससे संबंधित कार्रवाई के विराेध में राज्य के परिवहन व्यवसायियाें ने 5 मार्च काे राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया था. पुलिस की कार्रवाई इस विराेध का एक प्रमुख मुद्दा थी.
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक की अध्यक्षता में 2 मार्च काे एक बैठक आयाेजित की गई थी.उस बैठक में सरनाईक ने पुलिस के व्यवहार काे लेकर नाराजगी व्यक्त की थी. परिवहन संगठनाें के प्रतिनिधियाें और परिवहन मंत्री के बीच हुई बैठक के बाद ही यह परिपत्र जारी किया गया है.बैठक में परिवहन संगठनाें ने आराेप लगाया था कि ट्रैफिक पुलिस वाहनचालकाें काे लंबे समय तक राेककर रखती है और जुर्माना न भरने पर रिश्वत मांगती है. साथ ही कई मामलाें में चालक के साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है तथा वाहन और उससे संबंधित दस्तावेज जबरन जब्त कर लिए जाते हैं.बैठक में हुई चर्चा के आधार पर कार्य की आदर्श कार्यप्रणाली तय करते हुए पुलिस विभाग की ओर से यह परिपत्र जारी किया गया है. परिवहन संगठनाें के प्रतिनिधियाें ने इस निर्णय पर संताेष व्यक्त किया है.