मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सरकार ने राज्य में लव- जिहाद और संगठित धर्म परिवर्तन के मामलाें काे राेकने के लिए शुक्रवार काे एक ऐतिहासिक कदम उठाया है. गृह राज्य मंत्री पंकज भाेयर ने विधानसभा में बहुप्रतीक्षित महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता विधेयक, 2026 पेश किया.इसमें लालच, बल या धाेखाधड़ी से धर्म परिवर्तन कराने वालाें के लिए 10 साल की जेल और सख्त जुर्माने का प्रावधान है.शादी के लिए धर्म परिवर्तन काे न्यायिक प्रक्रिया में शून्य घाेषित किया जाएगा. ऐसी शादियाें से पैदा हुए बच्चाें के अधिकाराें की रक्षा के लिए, इसमें यह स्पष्ट प्रावधान है किउन्हें मां के मूल धर्म का माना जाएगा और उन्हें संपत्ति में कानूनी विरासत का अधिकार हाेगा. साथ ही, सख्त सजा का भी प्रावधान किया गया है.विरासत की लड़ाई में बच्चाें के अधिकार दांव पर क्या बेगुनाही का सिद्धांत खतरे में पड़ जाएगा?
आराेपी का खुद काे बेगुनाह साबित करने की ज़िम्मेदारी का यह सिद्धांत नेचुरल जस्टिस के खिलाफ है. इससे सिर्फ शक के आधार पर बेगुनाह लाेगाें काे परेशान किए जाने का डर बढ़ता है.अगर शादी के लिए धर्म बदलना अमान्य घाेषित किया जाता है, ताे उस शादी से पैदा हुए बच्चाें की वैधता पर सवाल उठेगा. पर्सनल और इस नए कानून के बीच अंतर भविष्य में प्राॅपर्टी के झगड़ाें और विरासत की लड़ाइयाें में बच्चाें के अधिकाराें काे खतरे में डाल सकता है.निजी अधिकाराें पर असर पड़ेगा जिला मजिस्ट्रेटाें के लिए धर्म बदलने की 60 दिन पहले सूचना देने की बाध्यता सुप्रीम काेर्ट के पुट्टास्वामी फैसले की अवमानना हाे सकती है. जीवनसाथी या धर्म चुनना पूरी तरह से एक वयस्क का निजी अधिकार है.हालांकि ऐसा लगता है कि 7 से 10 साल की सज़ा और गैर-ज़मानती धाराओं के कारण कानून से डर लगेगा, लेकिन असल में, पुलिस अधिकारियाें द्वारा इस कानून के गलत इस्तेमाल की बहुत ज़्यादा संभावना है.