महाराष्ट्र ट्रांसपाेर्टर्स एक्शन कमेटी की ओर से राज्य में पब्लिक ट्रांसपाेर्ट और गुड्स ट्रांसपाेर्ट के ड्राइवर और मालिक ई-चालान प्रणाली और गलत प्रशासनिक नियमाें के खिलाफ 5 मार्च से अनिश्चित काल के लिए विराेध-प्रदर्शन करेंगे. सभी गाड़ियां बंद रहेंगी. उन्हाेंने मांग की कि सरकार तुरंत फैसला ले.ट्रांसपाेर्ट संगठनाें ने राज्य में स्कूल बसाें, एम्प्लाॅई ट्रांसपाेर्ट बसाें, आंतरराज्य और अंतरराज्य बसाें, टूरिस्ट कैब, रिक्शा, टेम्पाे और पब्लिक सर्विस गाड़ियाें पर टैक्स, टाेल, ई-चालान प्रणाली और गलत प्रशासनिक नियमाें के खिलाफ विराेध करने का फैसला किया है. संगठन ने स्पष्ट ताैर पर कहा है कि अगर सरकारतुरंत सकारात्मक फैसला नहीं लेती है, ताे हड़ताल पर जाने के अलावा काेई विकल्प नहीं है.
अलग-अलग ट्रांसपाेर्ट संगठनाें के प्रतिनिधियाें ने शनिवार (28 फरवरी) काे पुणे में एक प्रेस काॅन्फ्रेंस में यह जानकारी दी. इस माैके पर बस ऑपरेटर्स कन्फेडरेशन ऑफ इंडिया के प्रसन्ना पटवर्धन, रिक्शा पंचायत के नेता नितिन पवार, रिक्शा एसाेसिएशन के नेता डाॅ. केशव क्षीरसागर, राजेंद्र सिंह राजपूत, बाबा शिंदे, बस एंड कार ओनर्स एसाेसिएशन के राजन जुनवणे, किरण देसाई, पिंपरी चिंचवड़ बस एसाेसिएशन के दत्तात्रय भेगड़े और कई अन्य पदाधिकारी माैजूद थे.उन्हाेंने कहा कि पब्लिक सर्विस व्हीकल जनता काे ज़रूरी सेवाएं देते हैं; लेकिन केंद्र और राज्य सरकारें अलगअलग टैक्स के ज़रिए इनसे बड़ी रकम वसूलती हैं. पेट्राेल-डीज़ल पर ‘सेस’ लगाकर सड़क बनाने के लिए पैसे जमा किए जाते हैं. बीओटी की तर्ज पर बनी सड़काें पर फिर से टाेल वसूला जाता है.
इस तरह गाड़ी मालिकाें पर दाेहरा आर्थिक बाेझ पड़ता है. कई टाेल राेड की हालत खराब हाेने के बावजूद, काॅन्ट्रैक्टर पर काेई कार्रवाई नहीं हाेती. माेटर व्हीकल एक्ट के नियमाें के बावजूद, लागू नहीं हाे रहा; लेकिन, नाे-पार्किंग जैसे कारणाें से बड़ी रकम का जुर्माना वसूला जाता है. शिकायत की गई कि कार्रवाई सिर्फ राजस्व बढ़ाने के मकसद से की जा रही है, जबकि जुर्माना ताे सज़ा का हिस्सा है.साथ ही अप्रैल 2025 में बाॅर्डर चेकपाॅइंट बंद करने की घाेषणा के बावजूद कई चेकपाॅइंट अभी भी चालू हैं और ड्राइवराें से गैर-कानूनी वसूली की जा रही है.