कागजाें में नहीं, अब जमीन पर दिखेगा सड़क चाैड़ीकरण

    31-Mar-2026
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सड़क चाैड़ीकरण से प्रभावित हाेने वाले क्षेत्र काे निर्माण पूर्ण हाेने के बाद भी मनपा काे साैंपने में निर्माण व्यवसायियाें द्वारा टालमटाेल की जाती है. इसके कारण सड़काें की चाैड़ाई केवल कागजाें में ही बढ़ती है. वास्तव में सड़कें संकरी ही रहती हैं और यातायात जाम जैसी समस्याएं उत्पन्न हाेती हैं. इस पृष्ठभूमि में मनपा के निर्माण विभाग ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है. सड़क चाैड़ीकरण से प्रभावित हाेने वाले क्षेत्र का कब्जा प्लिंथ जांच से पहले मनपा काे देना विकासकाें के लिए अनिवार्य कर दिया गया है. इस निर्णय से कागजाें में चाैड़ी दिखाई देने वाली सड़काें का वास्तविक रूप से स्थल पर चाैड़ीकरण हाेने का मार्ग प्रशस्त हाेगा.भू-स्वामी अथवा भूखंडधारक आर्किटे्नट के माध्यम से निर्माण प्लान की स्वीकृति के लिए निर्माण विभाग के पास प्रस्ताव प्रस्तुत करते हैं.
 
निर्माण विकास विभाग द्वारा इन प्रस्तावाें काे एकीकृत विकास नियंत्रण और प्राेत्साहन नियमावली के अनुसार निर्माण अनुमति प्रदान की जाती है. कुछ निर्माण अनुमति प्रस्तावाें में विकास याेजना के अनुसार सड़क चाैड़ीकरण से प्रभावित क्षेत्र दर्शाए जाते हैं. इसके अनुसार संबंधित क्षेत्र की कटाैती करके निर्माण अनुमति के प्रस्ताव स्वीकृत किए जाते हैं.वास्तव में प्रभावित सड़क क्षेत्र काे निर्माण अनुमति प्राप्त हाेने के बाद यथाशीघ्र मनपा काे साैंपना आवश्यक हाेता है. लेकिन कई मामलाें में भवन निर्माण पूर्ण हाेने तक प्रभावित सड़क क्षेत्र का कब्जा नहीं दिया जाता. इसके कारण संकरी सड़काें से यातायात जाम की स्थिति उत्पन्न हाेती है और नागरिकाें काे सतत पूर्ण चाैड़ाई वाली सड़क उपलब्ध नहीं हाे पाती.इस प्रकार की शिकायतें बड़ी संख्या में मनपा के पास प्राप्त हुई हैं. इस पृष्ठभूमि में नगर अभियंता अनिरुद्ध पावसकर ने प्रभावित सड़क क्षेत्र काे तत्काल मनपा के कब्जे में देना व्यवसायियाें के लिए अनिवार्य किया है और यदि ऐसा नहीं किया गया ताे संबंधित व्यवसायियाें पर कार्रवाई की चेतावनी दी है.