प्रश्न: ओशाे, भारत धर्मप्राण देश है. इसका एक सबूत यह है कि यहां के अदना गुरु भी अपनी शिष्य-संख्या लाख से नीची नहीं रखते हैं. लेकिन आश्चर्य है कि आपके जैसे सूर्य के समान तेजस्वी गुरु के भारतीय शिष्य इतने थाेड़े हैं.
इस बात पर कुछ प्रकाश डालने की कृपा करें.रामानंद अग्निहाेत्री, काेई देश धर्मप्राण नहीं है! न भारत, न चीन, न जापान, न ईरान, न पाकिस्तान- काेई देश धर्मप्राण नहीं है. देश धर्म प्राण हाे ही नहीं सकते.देश ताे राजनैतिक इकाइयां हैं, इनका क्या धर्मप्राण हाेने से संबंध हाे सकता है! देश के पास काेई प्राण हाेते हैं! जब प्राण ही नहीं हाेते ताे धर्मप्राण कैसे हाे जाएगा. व्यक्ति धर्मप्राण हाेते हैं, देश नहीं.जातियां नहीं, समूह नहीं, संगठन नहीं, र्सिफ व्यक्ति. यह ताे व्यक्ति की गरिमा है. तुमकाे कभी विचार नहीं उठा कि पहले प्राण ताे हाेने ही चाहिए. कम से कम प्राण ताे हाें, धार्मिक हाें, अधार्मिक हाें मगर प्राण ताे हाें. देशाें के पास काेई प्राण हाेते हैं! ये ताे राजनैतिक झूठ हैं. ये ताे राजनीति की चालें हैं.
पाकिस्तान कुछ दिन पहले, उन्नीस साै सैंतालीस के पहले भारत था, अब भारत नहीं है. क्या कहते तुम? अब पाकिस्तान धर्मप्राण है या नहीं? उन्नीस साै सैंतालीस के पहले था. अब? अब धर्मप्राण नहीं है. बंगलादेश पहले धर्मप्राण था, क्याेंकि भारत का हिस्सा था, अब धर्मप्राण नहीं है.ये ताे नक्शे पर खींची गयी लकीरें हैं. ये ताे राजनेताओं की चालबाजियां हैं. ये ताे राजनीति चलाए रखने के नुस्खे हैं. क्याेंकि दुनिया से राष्ट्र मिट जाएं ताे राजनीति मिट जाए. दुनिया अगर एक हाे जाए ताे राजनेताओं की क्या जगह बचती है! न झगड़ा हाेगा, न फसाद हाेगा, ताे ये राजनैतिक गुंडे और दादाओं की क्या जरूरत रह जाएगी! इनकी काैन कीमत रह जाएगी? इनकी कीमत इसीलिए है कि हमेशा खतरा है--ये हमेशा खतरा बनाएरखते हैं युद्ध का.
ये कभी तुम्हें शांति से नहीं बैठने देंगे, क्याेंकि तुम शांति से अगर बैठ गये ताे इनकी माैत हाे जाएगी. ये तुमकाे भड़काए ही रखते हैं. कभी हिंदू-मुस्लिम दंगा है, कभी गुजराती और मराठी लड़ रहे हैं और कभी हिंदू बाेलनेवाले-गैरहिंदी बाेलनेवाले लड़ रहे हैं. ये तुम्हें लड़ाए ही रखेंगे. लड़ाने पर इनकी सारी दाराेमदार है. भारत काे पाकिस्तान से लड़ाए रखेंगे; ईराक काे ईराक से लड़ाकररखेंगे;...अब दाेनाें मुसलमान देश हैं- दाेनाें धर्मप्राण देश हैं- क्या हाे गया इनकाे! राजनीति इस सबकी िफकर नहीं करती. राजनीति ताे एक िफकर रखती है कि किसी तरह दुनिया में झगड़े बने रहें. झगड़े न मिट जाएं.तुम कहते हाे, भारत धर्मप्राण देश हैफइस भ्रांति काे छाेड़ाे! काेई देश धर्मप्राण नहीं है. न कभी था, न कभी हाेगा. हाे ही नहीं सकता. व्यक्ति धर्मप्राण हाेते हैं. और उसी के कारण हमकाे भ्रांति हाे जाती है.हम व्यक्तियाें की आभा में साेचने लगते हैं कि हमारी आभा है.
एक सूी फकीर रात के अंधेरे में लालटेन लिए चल रहा है. रास्ते पर किसी और आदमी से उसका मिलना हाे गया, दाेनाें एक ही तरफ जा रहे हैं ताे दाेनाें साथ हाे लिए. जाे आदमी साथ चलने लगा, वह यह भूल गया कि मेरे साथ में लालटेन नहीं है. क्याेंकि जिसके हाथ में लालटेन थी, उसकी राेशनी दाेनाें काे काम दे रही थी. दाे मील तक दाेनाें साथ चले, िफर वह जगह आ गयी जहां उनकाे अलग-अलग हाे जाना था; चाैराहा आ गया, जहां सूी फकीर काे एक रास्ते पर जाना था और दूसरे काे दूसरे रास्ते पर.जैसे ही रास्ते मुड़े वैसे ही उस आदमी काे पता चला कि अरे, एकदम अंधकार हाे गया! तब उसे याद आयी कि मेरे हाथ में ताे लालटेन है ही नहीं. वह ताे लालटेन दूसरे की थी. उसकी उधार ज्याेति काे मैं अपनी समझता रहा. यह दाे मील तक ताे मैं भूल ही गया था कि अमावस की रात है. यह उधार ज्याेति से भ्रांति में मत पड़ाे!