अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 के अवसर पर मध्य रेल ने अपनी महिला शक्ति के उत्कृष्ट याेगदान और उपलब्धियाें का सम्मान किया. वर्तमान में मध्य रेल में 8,197 महिला कर्मचारी कार्यरत हैं, जाे लाेकाे पायलट से लेकर वेल्डर और आरपीएफ जैसे चुनाैतीपूर्ण क्षेत्राें में बाधाओं काे ताेड़ते हुए अपनी पहचान बना रही हैं. स्टेशन प्रबंधन के क्षेत्र में मुलुंड स्टेशन की मैनेजर ममता कुलकर्णी (मुंबई मंडल की पहली महिला स्टेशन मैनेजर) और माटुंगा स्टेशन की सारिका सावंत ने मिसाल पेश की है.माटुंगा स्टेशन पूरी तरह महिला स्टाफ द्वारा संचालित हाेने के कारण मलिम्का बुक ऑफ रिकाॅर्ड्सफ में भी दर्ज है. वहीं, परिचालन और तकनीकी क्षेत्र में कल्याण की लाेकाे पायलट अनुपमा पाटील और पनवेल की ट्रेन मैनेजर प्रियंका मुदलियार पुरुष प्रधान क्षेत्राें में नई पीढ़ी का मार्ग प्रशस्त कर रही हैं.
रेलवे की सुरक्षा और यात्री सेवा में भी महिलाओं का दबदबा बढ़ा है. ठाणे की आरपीएफ कांस्टेबल साेनम विश्वकर्मा और नाज़नीन कुरैशी ममेरी सहेलीफ जैसे अभियानाें के जरिए महिला सुरक्षा सुनिश्चित कर रही हैं. प्रतिष्ठित वंदे भारत एक्सप्रेस में सारिका ओझा और वर्षा तायडे जैसी टीटीई भारतीय रेल की आधुनिक और समर्पित छवि प्रस्तुत कर रही हैं. इसके अलावा, माटुंगा वर्कशाॅप में पूजा सिंह और स्वप्नाली थाेराट जैसी महिला वेल्डर कठिन परिस्थितियाें में तकनीकी दक्षता का प्रदर्शन कर रही हैं. मध्य रेल एक समावेशी वातावरण बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, जहाँ पाॅइंट्समैन से लेकर उद्घाेषक तक हर भूमिका में महिलाएँ नेतृत्व कर रही हैं.