महिला दिवस विशेष : सेवानिवृत्ति के बाद समाज काे संस्कृत की विरासत से जाेड़ रहीं अपर्णा पुराणिक

    09-Mar-2026
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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर हम एक ऐसी प्रेरक महिला की कहानी साझा कर रहे हैं, जिन्हाेंने यह साबित कर दिया कि समाज सेवा के लिए उम्र या सेवानिवृत्ति काेई बाधा नहीं है. ठाणे जिले के डाेंबिवली की निवासी अपर्णा सतीश पुराणिक, जाे एक पूर्व बैंक प्रबंधक हैं, वर्तमान में निःशुल्क संस्कृत शिक्षा के माध्यम से समाज काे सशक्त बनाने का कार्य कर रही हैं. मूल रूप से जलगांव जिले के चालीसगांव में जन्मी और पली-बढ़ी अपर्णा जी ने बैंकिंग क्षेत्र में एक लंबा और सफल सफर तय किया. उन्हाेंने पंजाब नेशनल बैंक में 38 वर्षाें तक अपनी उत्कृष्ट सेवा दी और प्रबंधक के पद से सेवानिवृत्त हुईं. लेकिन उनके जीवन का असल उद्देश्य इस पड़ाव के बाद शुरू हुआ. आज वे अपना संपूर्ण समय ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमाें से सभी आयु वर्ग के विद्यार्थियाें काे संस्कृतसिखाने में समर्पित कर रही हैं.
 
पुराणिक का उद्देश्य नई पीढ़ी काे भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और शास्त्राें के शाश्वत ज्ञान से पुनः जाेड़ना है. उनके संवादात्मक और मूल्य-आधारित शिक्षण के कारण न केवल छात्र, बल्कि कामकाजी पेशेवर और गृहिणियाँ भी बड़ी संख्या में उनसे जुड़ रही हैं.एक मजबूत राष्ट्र की नींव उसकी संस्कृति में हाेती है. संस्कृत सीखकर ही हम अपनी जड़ाें और शास्त्राें के वास्तविक मूल्याें काे समझ सकते हैं. उनकी इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे यह शिक्षा पूर्णतः निःशुल्क प्रदान करती हैं, ताकि आर्थिक स्थिति किसी के लिए ज्ञान के मार्ग में बाधा न बने. चालीसगांव से बैंकिंग के शीर्ष नेतृत्व तक और अब एक सांस्कृतिक मार्गदर्शक के रूप में उनकी यह यात्रा वास्तव में अनुकरणीय है. इस महिला दिवस पर हम उनके इस निस्वार्थ समर्पण और ज्ञान की सेवा काे नमन करते हैं, जाे यह दर्शाता है कि सेवानिवृत्ति वास्तव में एक बड़े सामाजिक उद्देश्य की शुरुआत हाे सकती है.