भारतीय महिलाएं अब न केवल घर चलाने में, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था काे गति देने में भी आगे हैं. देश की महिला कर्जदाराें ने अभूतपूर्व आर्थिक छलांग लगाते हुए अपना ऋण पाेर्टफाेलियाे सीधे 16 लाख कराेड़ रुपये से बढ़ाकर 76 लाख कराेड़ रुपये तक पहुंचा दिया है.नीति आयाेग की ताजा रिपाेर्ट से महिलाओं की यह दमदार आर्थिक शक्ति सामने आई है. हालांकि, जहां उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, वहीं महाराष्ट्र में महिला कर्जदाराें की हिस्सेदारी स्थिर बनी हुई है.इस रिपाेर्ट में नीतिगत बदलाव, डिजिटल सशक्तिकरण और वित्तीय साक्षरता पर जाेर देने की आवश्यकता काे रेखांकित किया गया है.
बताया गया कि दिसंबर 2017 से दिसंबर 2025 कीअवधि के दाैरान महिला कर्जदाराें की संख्या में 9% वार्षिक दर से वृद्धि हुई है. ऋण लेने वाली महिलाओं का प्रमाण 19% से बढ़कर सीधे 36% हाे गया है. 2022 से 2025 के बीच महिलाओं के व्यावसायिक ऋण में लगभग 31% वार्षिक वृद्धि हुई है, जाे कुल व्यावसायिक ऋण वृद्धि (17%) की तुलना में लगभग दाेगुनी है. वर्तमान में कुल सक्रिय महिला कर्जदाराें की संख्या 16 कराेड़ हाे गई है. हाेम लाेन की मांग में हुई वृद्धि महिलाओं में संपत्ति के स्वामित्व बढ़ने के शुभ संकेत दे रही है. भारत में वर्तमान में लगभग 45 कराेड़ महिलाएं ऋण लेने के पात्र हैं. केवल दक्षिण और पश्चिम भारत ही नहीं, बल्कि अब उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे उत्तरी राज्याें में भी महिलाओं के ऋण लेने की संख्या तेजी से बढ़ रही है.