राज्य की लगभग 21 हजार पतसंस्थाओं में करीब 90,500 कराेड़ रुपये की जमा राशि है. जमाकर्ताओं की पतसंस्थाओं में एक लाख रुपये तक की डिपाॅजिट्स काे सुरक्षा देने के लिए सहकार आयुक्तालय ने पहल की है. इसके लिए बीमा कंपनियाें द्वारा दिए गए अभिरुचि प्रस्तावाें पर बैठक में सकारात्मक चर्चा हुई है. प्राप्त प्रस्तावाें में से उपयुक्त कंपनी के चयन के बाद पतसंस्थाओं की डिपाॅजिट्स काे भी सुरक्षा देने का मार्ग प्रशस्त हाेगा.पतसंस्थाओं में छाेटे व्यवसायी, खुदरा व्यापारी और लघु उद्यमी अपनी डिपाॅजिट् रखते हैं.इस पृष्ठभूमि में बैंकाें की तरह पतसंस्थाओं की जमाओं काे भी सुरक्षा देने की मांग उठ रही है. राज्य की सहकारी पतसंस्थाओं तथा बहुराज्यीय सहकारी पतसंस्थाओं के जमाकर्ताओं की जमा काे सुरक्षित करने के लिए इन संस्थाओं काे भी डिपाॅजिट इंश्याेरेंस एंड क्रेडिट गारंटी काॅरपाेरेशन से बीमा सुरक्षा देने के संबंध मेंराज्य सरकार ने पिछले वर्ष पत्र के माध्यम से केंद्रीय सहकार मंत्रालय से अनुराेध किया था.
इसी संदर्भ में पतसंस्थाओं की जमाओं काे बीमा सुरक्षा देने के लिए प्रमुख बीमा कंपनियाें से अभिरुचि प्रस्ताव आमंत्रित किए गए थे. बीमा कंपनियाें के प्रतिनिधियाें के साथ सहकार विभाग की बैठक हाल ही में आयाेजित की गई.सहकार विभाग ने काेऑपरेटिव मैनेजमेंट इन्फाॅर्मेशन सिस्टम के तहत पतसंस्थाओं की जानकारी दर्ज की है. इसमें संस्थाओं का आर्थिक वर्गीकरण किया गया है. हालांकि अभी कुछ संस्थाओं कीजानकारी दर्ज हाेना बाकी है, जिसे जल्द पूरा किया जा रहा है. बैंकाें में पांच लाख रुपये तक की डिपाॅजिट् काे जिस प्रकार सुरक्षा प्रदान की जाती है, उसी तर्ज पर पतसंस्थाओं में एक लाख रुपये तक की जमाओं काे सुरक्षा देने का प्रस्ताव सहकार विभाग द्वारा रखा गया है.पतसंस्थाओं की डिपाॅजिट्स काे सुरक्षित करने के लिए सरकार ने स्थिरीकरण और तरलता सहायता निधि याेजना भी तैयार की है, जिसे 1 जनवरी 2024 काे मंजूरी दी गई थी. सहकारी संस्थाओं के अपर निबंधक डाॅ. पी.एल. खंडागले ने बताया कि बीमा कंपनियाें काे पतसंस्थाओं के आर्थिक वर्गीकरण की जानकारी दी जाएगी.प्रक्रिया काे शीघ्र पूर्ण कर पतसंस्थाओं की डिपाॅजिट्स काे सुरक्षा देने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं.