मिडिल-ईस्ट में जंग का सीधा असर अब भारत के ढाई लाख कराेड़ रुपये के फार्मा सेक्टर यानी दवा उद्याेग पर भी दिखने लगा है. दवा बनाने के लिए जरूरी खास केमिकल, जैसे मेथनाॅल और प्राेपलीन की सप्लाई में भारी द्निकतें आ रही हैं, जिसके चलते यह उद्याेग संकट में पड़ता दिखाई दे रहा है.पेट्राेकेमिकल मार्केट में भारी अस्थिरता के चलते भारत में मेथनाॅल की कीमतें चार साल के उच्चतम स्तर काे पार कर गई हैं.प्राेपलीन की कीमतें भी बढ़ रही हैं, जाे कि इबुप्राेफेन जैसी दवाओं के इंटरमीडिएट्स बनाने के लिए जरूरी है. यह स्थिति भारत के फार्मा सेक्टर की पेट्राेकेमिकल उद्याेग पर भारी निर्भरता के कारण भी पैदा हुई है. लिहाजा, भारत से 200 से ज्यादा देशाें काे दवाओं के निर्यात पर असर पड़ रहा है. प्राेपेन गैस का इस्तेमाल रिएक्टर्स और स्टीम जेनरेशन में हाेता है, लेकिन इसकी भारी कमी के कारण गुजरात, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की कई कंपनियाें काे अपना उत्पादन बंद करना पड़ सकता है. आने वाले कुछ दिनाें में देश में दवाओं की कमी हाे सकती है. फार्मास्युटिकल्स एक्सपाेर्ट प्रमाेशन काउंसिल ऑफ इंडिया (फार्मे क्सिल) ने कहा है कि मिडिल-ईस्ट संकट के कारण आपूर्ति और माल ढुलाई में तमाम तरह की रुकावट आई हैं. फार्मा उद्याेग काे 2,500 कराेड़ से लेकर 5,000 कराेड़ रुपये तक के नुकसान का सामना करना पड़ रहा है.