बुजुर्ग माता-पिता द्वारा बच्चाें काे दी गई संपत्ति की वापसी संभव : बाॅम्बे हाईकाेर्ट

    15-May-2026
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HC 
 
बाॅम्बे हाई काेर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकाें का भरण-पाेषण और कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत, बुजुर्गाें द्वारा अपने बच्चाें काे हस्तांतरित की गई काेई भी संपत्ति अंतर्निहित रूप से सशर्त मानी जाएगी. अदालत ने कहा कि यदि बच्चे अपने माता-पिता की बुनियादी जरूरताें और सुख-सुविधाओं का ख्याल नहीं रखते हैं, ताे ऐसी संपत्ति का हस्तांतरण रद्द किया जा सकता है.जस्टिस संजय एस. देशमुख की एकल पीठ ने सांगली के एक 46 वर्षीय व्यक्ति की याचिका काे खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया. याचिकाकर्ता ने सांगली ट्रिब्यूनल के उस आदेश काे चुनाैती दी थी, जिसने उसकी 67 वर्षीय मां द्वारा उसके पक्ष में किए गए हक त्याग काे रद्द कर दिया था.
 
मां ने आराेप लगाया था कि संपत्ति मिलने के बाद उनकाबेटा उनकी देखभाल नहीं कर रहा है. अदालत ने अधिनियम की धारा 23 का हवाला देते हुए कहा कि जब काेई वरिष्ठ नागरिक अपनी संपत्ति किसी काे देता है, ताे यह मान लिया जाता है कि लेने वाला व्यक्ति उनकी शारीरिक आवश्यकताओं और बुनियादी सुविधाओं की पूर्ति करेगा. यदि वह इसमें विफल रहता है, ताे यह माना जाएगा कि हस्तांतरण धाेखाधड़ी या दबाव में किया गया था. ऐसी स्थिति में ट्रिब्यूनल काे उस हस्तांतरण काे शून्य घाेषित करने का पूरा अधिकार है. हाई काेर्ट ने इस तर्क काे भी सिरे से खारिज कर दिया कि केवल मासिक भरण-पाेषण देने से संपत्ति वापसी से बचा जा सकता है.काेर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि बच्चाें काे यह अनुमति नहीं दी जा सकती कि वे पहले माता-पिता की जीवनभर की पूंजी छीन लें और फिर मामूली मासिक रकम देकर कानूनी सुरक्षा से ‘छुटकारा’ पाने की काेशिश करें.