रामटेकड़ी में कचरे से बिजली उत्पादन करने वाली परियाेजना काे वर्ष 2018 में वर्क ऑर्डर दिए जाने के बावजूद अब तक वहां एक यूनिट भी बिजली उत्पादन नहीं हाे सका है. प्रतिदिन लगभग 750 टन कचरे के प्रसंस्करण काे मंजूरी देने वाली सत्ताधारी भाजपा और कचरे के मुद्दे पर लगातार आवाज उठाने वाले विपक्षी दल भी इस परियाेजना काे लेकर चुप्पी साधे हुए हैं, जिससे घाेटाले की आशंका व्यक्त की जा रही है.शहर में एकत्रित हाेने वाले सूखे कचरे से बिजली उत्पादन करने वाली परियाेजना काे 20 फरवरी 2018 काे स्थायी समिति ने मंजूरी दी थी. यह काम मे. पुणे बायाे एनर्जी सिस्टम प्रा. लि. कंपनी काे दिया गया था.प्रतिदिन 750 टन कचरे से 13.5 मेगावाॅट बिजली उत्पादन किया जाना था. इसके लिए ठेकेदार काे 669 रुपये प्रति मीट्रिक टन टिपिंग फीस दी जानी थी और हर वर्ष इस फीस में 5 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी, ऐसा भीप्रस्ताव में उल्लेख किया गया था. 29 जून 2018 काे मनपा ने इस कंपनी के साथ करार किया था.
करार के अनुसार परियाेजना का निर्माण और वास्तविक बिजली उत्पादन वर्ष 2022 में शुरू हाेना अपेक्षित था. करार के अनुसार मनपा ने परियाेजना निर्माण के लिए अब तक लगभग 60 कराेड़ रुपये ठेकेदार काे दिए हैं.इसके बाद इस परियाेजना से बिजली खरीदने काे लेकर मनपा पुणे बायाे एनर्जी सिस्टम प्रा. लि. और महाराष्ट्र राज्य विद्युत महावितरण मंडल के बीच 12 अगस्त 2022 काे संयुक्त बिजली खरीद करार भी किया गया था. बिजली उत्पादन शुरू हाेने के बाद 13.5 मेगावाॅट में से 11.5 मेगावाॅट बिजली नेट मीटरिंग के माध्यम से राज्य विद्युत मंडल काे दी जानी थी और शेष 2 मेगावाॅट बिजली परियाेजना संचालन के लिए उपयाेग की जानी थी. लेकिन मई 2026 आ चुका है और अब तक इस परियाेजना से एक यूनिट भी बिजली उत्पादन नहीं हुआहै.
बल्कि मई 2021 से इस परियाेजना में सूखे कचरे से केवल आरडीएफ तैयार कर उसे सीमेंट कंपनियाें काे दिया जा रहा है. मनपा शहर के कचरे के निपटान के लिए प्रयास कर रही है, लेकिन ऐसी लाभकारी और अन्यत्र सफल साबित हुई याेजनाओं काे लागू नहीं कर रही है. इसके विपरीत केवल ठेकेदाराें काे लाभ पहुंचाने और भ्रष्टाचार करने वालाें काे बढ़ावा दिया जा रहा है, यह एक बार फिर सामने आया है.साैभाग्य से मनपा में चार वर्षाें के प्रशासकीय शासन के बाद फिर से भाजपा की सत्ता आई है. लेकिन भाजपा नेतृत्व काे कचरा प्रबंधन सही है या नहीं, प्रक्रिया परियाेजनाएं ठीक तरह से चल रही हैं या नहीं, परियाेजनाओं के सामने काैन-काैन सी समस्याएं हैं, इससे काेई लेनादेना नहीं है. केवल नई परियाेजनाओं और टेंडर प्रक्रिया में ही रुचि दिखाई दे रही है. पिछले तीन महीनाें में यही सामने आया है. विपक्ष काे भी टेंडर प्रक्रिया के अलावा पहले से चल रही परियाेजनाओं से काेई सराेकार नहीं है.