राेजगार बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य के काैशल विकास मंत्रालय के तहत रजिस्टर्ड कुछ निजी संस्थाएं छात्राें से लाखाें रुपये की फीस वसूलकर उन्हें ठग रही हैं. इन छात्राें की न ताे परीक्षा ली जा रही है और न ही उन्हें वादे के मुताबिक राेजगार दिया जा रहा है. केंद्र सरकार के काैशल विकास कार्यक्रम के नाम पर इस तरह का भ्रष्टाचार चल रहा है, क्या राज्य सरकार का इसे मूक समर्थन प्राप्त है? यह तीखा सवाल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) के प्रदेश महासचिव व प्रवक्ता सुनील माने ने एक पत्रकार परिषद में उठाया.आरटीआई से हुआ बड़ा खुलासा एकेडमी की कार्यप्रणाली का पर्दाफाश करते हुए सुनील माने ने कहा, संस्था में प्रवेश लेने वाले 170 छात्राें में से करीब 80 छात्राें की परीक्षा ही नहीं ली गई है.उन्हें काेर्स पूरा हाेने का प्रमाणपत्र भी नहीं दिया गया.
जब छात्राें ने संस्थान से पूछताछ की, ताे प्रबंधन ने झूठ बाेला कि सरकार की ओर से ही परीक्षा आयाेजित नहीं की गई है. हालांकि, जब मैंने महाराष्ट्र राज्यकाैशल, व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण बाेर्ड से सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत जानकारी मांगी, ताे बाेर्ड ने स्पष्ट किया कि अमिगाे एकेडमी ने छात्राें की परीक्षा से जुड़ी जरूरी प्रशासनिक प्रक्रिया ही पूरी नहीं की थी.परीक्षा न हाेने के कारण छात्राें काे बाेर्ड का आधिकारिक सर्टिफिकेट नहीं मिला, जिससे उन्हें नाैकरियां नहीं मिल पा रही हैं. हर छात्र काे शत-प्रतिशत नाैकरी देने का दावा करने वाली अमिगाे एकेडमी ने बहुत ही कम छात्राें काे प्लेसमेंट दिया है, वह भी महज 10 से 15 हजार रुपये प्रतिमाह की मामूली पगार पर. इस दाैरान सुनील माने ने चेतावनी दी कि इस पूरे फर्जीवाड़े के खिलाफ वे पुणे के पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार से मिलकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराने जा रहे हैं.उन्हाेंने राज्य के काैशल विकास मंत्री मंगलप्रभात लाेढा से भी इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने और दाेषी एकेडमी के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की है.