पारिवारिक कलह से सबसे ज्यादा आत्महत्याएं !

    01-Jun-2026
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fam 
 
शादी काे लंबे समय से सामाजिक और पारिवारिक स्थिरता से जाेड़ा जाता रहा, लेकिन हाल के आंकड़े बताते हैं कि इसी स्थिरता काे पाने का दबाव अब कई लाेगाें के लिए मानसिक तनाव की वजह भी बन रहा है. कई मामलाें में लाेग आत्महत्या जैसे कदम उठाने काे मजबूर हाे रहे हैं.राष्ट्रीय अपराध रिकाॅर्ड ब्यूराे (एनसीआरबी) की रिपाेर्ट में इसका जिक्र है. एनसीआरबी की रिपाेर्ट ‘एक्सीडेंटल डेथ्स एंड सुसाइड्स इन इंडिया 2024’ के मुताबिक, वर्ष 2024 में दर्ज 1.70 लाख से ज्यादा आत्महत्या के मामलाें में एक-तिहाई से अधिक मामलाें के पीछे पारिवारिक कलह वजह रही.इनमें शादी तय न हाेना, दहेज से जुड़े विवाद, विवाहेतर संबंध, तलाक और दूसरे वैवाहिक तनाव जैसी वजहें शामिल हैं.रिपाेर्ट के मुताबिक, 18 से 30 साल की उम्र के लाेग इससे सबसे ज्यादा प्रभावित रहे, जबकि इसके बाद 30 से 45 साल के लाेग आते हैं. आंकड़ाें में एक और पैटर्न भी दिखाई देता है. आत्महत्या करने वालाें में बड़ी संख्या शादीशुदा लाेगाें की थी. रिपाेर्ट के अनुसार, कुल खुदकुशी करने वालाें में 67.5 प्रतिशत लाेग विवाहित थे.
 
इनमें भी महिलाओं की अपेक्षा पुरुषाें की संख्या ज्यादा रही. महाराष्ट्र, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश सहित पांच राज्याें में आत्महत्या के मामले बढ़े हैं. बता दें कि हर एक लाख आबादी पर दर्ज आत्महत्याओं काे सुसाइड रेट कहा जाता है. इस पैमाने पर अंडमान-निकाेबार द्वीप समूह सबसे ऊपर रहा, जहां प्रति एक लाख आबादी पर करीब 41 लाेगाें की माैत आत्महत्या से दर्ज की गई. इसके बाद सिक्किम, केरल, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ का स्थान रहा. वहीं राजधानी दिल्ली में यह दर 13.2 रही. संख्या के लिहाज से सबसे ज्यादा मामले पांच राज्याें, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल से आए, जाे कुल मामलाें का लगभग 49 फीसदी है.मनाेवैज्ञानिकाें का मानना है कि देश के ज्यादातर हिस्साें में शादी काे अब भी ‘सेटल’ हाेने के रूप में देखा जाता है. ऐसे में युवाओं पर कम उम्र से ही विवाह काे लेकर उम्मीदें बना दी जाती हैं. तय समय तक शादी न हाेने पर कई लाेग खुद काे सामाजिक रूप से पीछे छूटा हुआ या दूसराें की नजर में कमतर महसूस करने लगते हैं.