भाेसरी एमआईडीसी क्षेत्र में एक बड़ा अतिक्रमण घाेटाला सामने आया है, जहां 50 से अधिक औद्याेगिक इकाइयाें ने कथित ताैर पर प्राकृतिक जल निकासी चैनलाें (नालाें) पर अवैध निर्माण किया है, जिससे औद्याेगिक बेल्ट में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है. नागरिक अधिकारियाें के अनुसार, कई कंपनी मालिकाें ने कथित ताैर पर स्थानीय राजनीतिक संरक्षण के सह पर, नालाें में मलबा फेंककर और उनके ऊपर स्थायी संरचनाओं का निर्माण करके प्राकृतिक नालाें पर अतिक्रमण कर लिया. अनियंत्रित अतिक्रमणाें ने बारिश के पानी के प्राकृतिक प्रवाह काे गंभीर रूप से बाधित कर दिया है, जिससे मानसून के दाैरान औद्याेगिक क्षेत्र के बड़े हिस्साें में बार-बार जलभराव हाेता है. पिंपरीचिंचवड़ मनपा ने संबंधित कंपनियाें काे नाेटिस जारी कर उन्हें तुरंत अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया है.
मनपा के आक्रामक रुख ने अब अतिक्रमण करने वाली औद्याेगिक इकाइयाें के बीच दहशत पैदा कर दी है. दूसरी ओर, निवासियाें, श्रमिकाें और वार्षिक बाढ़ से प्रभावित वास्तविक उद्याेगपतियाें ने इस कार्रवाई का स्वागत किया है. कई लाेगाें ने मांग की है कि मनपा राजनीतिक दबाव के आगे झुके बिना डिमाेलिशन (ध्वस्तीकरण) अभियान काे पूरा करे, और चेतावनी दी है कि यदि नालाें काे तुरंत साफ नहीं किया गया ताे आने वाला मानसून स्थिति काे और खराब कर सकता है.भाेसरी एमआईडीसी में कई प्राकृतिक वर्षा जल नाले हैं जाे औद्याेगिक क्षेत्र के माध्यम से वर्षा जल ले जाते हैं.हालांकि, पिछले कुछ वर्षाें में, कई औद्याेगिक इकाइयाें ने कथित ताैर पर इन नालाें के हिस्साें काे अवैध रूप से भरकर अपने परिसराें का विस्तार किया.
अधिकारियाें ने कहा कि कुछ कंपनियाें ने निर्माण मलबे से नालाें काे पूरी तरह से दफन कर दिया, जबकि अन्य ने सीधे जल निकासी मार्ग के भीतर ही कंपाउंड वाॅल, शेड और संरचनाएं बनाईं. इसने प्राकृतिक जल प्रवाह काे बाधित कर दिया है और पूरे एमआईडीसी क्षेत्र में बाढ़ की समस्याओं काे बढ़ा दिया है.एमआईडीसी के पास मैनपाॅवर व मशीनरी की कमी अधिकारियाें ने कहा कि औद्याेगिक जल निकासी बुनियादी ढांचे काे बनाए रखने की जिम्मेदारी तकनीकी रूप से महाराष्ट्र औद्याेगिक विकास महामंडल (MIDC) की है. हालांकि एमआईडीसी ने अतिक्रमण की गंभीरता काे स्वीकार किया और कार्रवाई करने की तत्परता व्यक्त की, लेकिन कथित ताैर पर उसके पास बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाने और बंद नालाें काे फिर से खाेलने के लिए उत्खनन जैसी पर्याप्त मैनपाॅवर और भारी मशीनरी की कमी है. अपनी सीमाओं काे पहचानते हुए, एमआईडीसी ने डिमाेलिशन कार्य करने के लिए नगर निगम से सहायता मांगी