शिक्षा विभाग ने 3 जून काे पुणे विभाग में इंटीग्रेटेड जूनियर काॅलेजाें और काॅलेज-काेचिंग क्लास के सांठगांठ काे निशाना बनाते हुए एक विशेष निरीक्षण अभियान का आदेश दिया है. विभाग ने जिला अधिकारियाें काे बायाेमेट्रिक उपस्थिति नियमाें, संस्थागत स्वीकृतियाें और अन्य नियामक आवश्यकताओं के अनुपालन काे सत्यापित करने का निर्देश दिया है. उप शिक्षा संचालक (पुणे विभाग) गणपत माेरे ने 3 जून काे पुणे, अहिल्यानगर और साेलापुर जिलाें के शिक्षा अधिकारियाें (माध्यमिक) काे शहरी और ग्रामीण दाेनाें क्षेत्राें में जूनियर काॅलेजाें के निरीक्षण के लिए विशेष उड़न दस्ते (फ्लाइंग स््नवाड) गठित करने का निर्देश देते हुए एक पत्र जारी किया.
नर्देश के अनुसार, निरीक्षण टीमें कई मापदंडाें के आधार पर काॅलेजाें की जांच करेंगी, जिनमें मूल मान्यता और अनुमाेदन दस्तावेज, संस्थागत पंजीकरण रिकाॅर्ड, बायाेमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली का कार्यान्वयन, छात्र उपस्थिति रजिस्टर, सामान्य रजिस्टर, इन्फ्रास्ट्रक्चर और यदि काेई काेचिंग क्लास के साथ सांठगांठ है ताे उसकी प्रकृति शामिल है. अधिकारियाें काे छात्राें, अभिभावकाें और अन्य हितधारकाें से प्राप्त शिकायताें की जांच करने; और जहां कहीं भी नियमाें का उल्लंघन पाया जाए, वहां कार्रवाई की सिफारिश करने वाले प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए भी कहा गया है. फ्लाइंग स््नवाडाें से अपनी रिपाेर्ट उप संचालक कार्यालय काे साैंपने की उम्मीद है, जिसके बाद मानदंडाें का उल्लंघन करने वाले संस्थानाें के खिलाफ आगे की कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है.
यह कदम राज्य के प्रतियाेगी परीक्षा इकाेसिस्टम में इंटीग्रेटेड काॅलेज-काेचिंग क्लास के सांठगांठ की कार्यप्रणाली और भूमिका, तथा अनिवार्य बायाेमेट्रिक उपस्थिति मानदंडाें के कथित गैर-अनुपालन काे लेकर चिंताओं के बीच उठाया गया है. इस निर्णय का स्वागत करते हुए, युवा सेना के संयुक्त सचिव, कल्पेश यादव ने कहा, जूनियर काॅलेजाें काे सत्यापित करने का निर्णय एक सकारात्मक कदम है. यह कवायद केवल कागजी कार्रवाई या कुछ जिलाें तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए. पूरे राज्य में इसी तरह के निरीक्षण किए जाने चाहिए और नियमाें का उल्लंघन करने वाले संस्थानाें काे सख्त कार्रवाई का सामना करना चाहिए. छात्राें के शैक्षणिक हित ही प्राथमिकता बने रहने चाहिए.