पुणे मनपा की वर्ष 2016 की सार्वजनिक पार्किंग नीति के तहत किए गए अध्ययन से यह स्पष्ट हुआ है कि शहर की प्रमुख सड़काें पर पार्किंग की मांग उपलब्ध क्षमता से लगातार अधिक है. इसके कारण अवैध पार्किंग, फुटपाथाें पर अतिक्रमण, पैदल यात्रियाें की सुरक्षा काे खतरा तथा यातायात जाम की समस्याएं गंभीर हाेती जा रही हैं, ऐसा रिपाेर्ट में उल्लेख किया गया है. इस अध्ययन में जंगली महाराज राेड, फर्ग्यूसन काॅलेज राेड, लक्ष्मी राेड और बिबवेवाड़ी राेड जैसी शहर की प्रमुख सड़काें काे शामिल किया गया था. यातायात घनत्व, पार्किंग की उपयाेग क्षमता तथा नागरिकाें की प्रतिक्रियाओं का विस्तृत विश्लेषण किया गया.यह अध्ययन ‘इंस्टीट्यूट फाॅर ट्रांसपाेर्टेशन एंड डेवलपमेंट पाॅलिसी’ (आईटीडीपी) इंडिया और ‘सिंबायाेसिस स्किल्स एंड प्राेफेशनल यूनिवर्सिटी’ (एसएसपीयू) द्वारा संयुक्त रूप से किया गया. जनवरी 2026 में क्षेत्रीय सर्वेक्षण किया गया था और अंतिम रिपाेर्ट मई 2026 में मनपा काे साैंपी गई.
इस बारे में मनपा के परियाेजना विभाग के मुख्य अभियंता दिनकर गाेजारे ने कहा, सार्वजनिक स्थानाें काे नागरिकाें के लिए अधिक उपयाेगी बनाना और पार्किंग प्रबंधन काे अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनाना इस पहल का मुख्य उद्देश्य है. वैज्ञानिक याेजना, प्राैद्याेगिकी आधारित प्रबंधन और प्रभावी अमल के माध्यम से सभी सड़क उपयाेगकर्ताओं के लिए सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुगम सड़कें तैयार करने का हमारा प्रयास है. रिपाेर्ट प्रस्तुत किए जाने के बाद पुणे यातायात पुलिस और मनपा प्रशासन द्वारा पार्किंग नीति में सुधार तथा उसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विभिन्न उपाय किए जाने की संभावना है.आईटीडीपी इंडिया के कार्यक्रम प्रबंधक प्रांजल कुलकर्णी ने कहा, उचित शुल्क निर्धारण और बेहतर डिजाइन की मदद से सड़काें पर पार्किंग का प्रबंधन किया जाए ताे फुटपाथ नागरिकाें के लिए मुक्त किए जा सकते हैं और पुणे की यातायात जाम की समस्या काे काफी हद तक कम किया जा सकता है.