बैंकों में 98000 करोड़ का कोई वारिस नहीं !

वित्त मंत्रालय द्वारा संसद में पेश आंकड़ों से जानकारी उजागर

    14-Aug-2026
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नई दिल्ली, 13 अगस्त (वि.प्र.)
भारतीय बैंकाें में पड़े 98000 कराेड़ का काेई वारिस नहीं है.वित्त मंत्रालय की ओर से संसद में दिए आंकड़ाें से जानकारी उजागर हुई है.
 
एसबीआई के खाताें में सबसे ज्यादा रकम हाेने की बात कही गई है. 20 हजार कराेड़ से ज्यादा की रकम लावारिस पाई गई है. पीएनबी में 7585 कराेड़ रु अन्नलेमड पड़े हैं.आरबीआई ने लावारिस रकम बढ़ने के चलते बैंकाें काे कई जरूरी निर्देश दिए. भारतीय बैंकाें में लंबे समय से बिना दावे के पड़ी रकम लगातार बढ़ रही है. बैंकाें ने 31 जनवरी 2026 तक अपने यहां जमा करीब 98,073 कराेड़ के अनक्लेम्ड डिपाॅजिट काे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के डिपाॅजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड में ट्रांसफर कर दिया था. 30 जून 2025 तक यह रकम 90,545 कराेड़ थी.यानी करीब सात महीनाें में इसमें 7,528 कराेड़ की बढ़ाेतरी हुई. वित्त मंत्रालय की ओर से संसद में दिए गए आंकड़ाें से पता चलता है कि बड़ी संख्या में बैंक खाताें में जमा रकम पर खाताधारक या उनके परिवार की ओर से लंबे समय तक काेई दावा नहीं किया जाता. हालांकि, ऊए ऋर्ीपव में पैसा ट्रांसफर हाेने का मतलब यह नहीं है कि इन पैसाें पर से खाताधारक या उसके कानूनी वारिस का अधिकार खत्म हाे गया. आरबीआई के मुताबिक, कई बैंक खाताें में ग्राहकाें की जानकारी पुरानी या अधूरी हाेती है. पुराने पते, बदले हुए माेबाइल नंबर या अपडेट न की गई ईमेल आईडी जैसी वजहाें से बैंक खाताधारकाें से संपर्क नहीं कर पाते.
 
कई मामलाें में खाताधारक की मृत्यु के बाद भी खाते में जमा रकम बिना दावे की रह जाती है. परिवार के सदस्याें या नाॅमिनी काे कई बार उस बैंक खाते की जानकारी ही नहीं हाेती.