भोपाल गैस त्रासदी स्थल के पास 68% पानी के नमूनों में सीवेज प्रदूषण

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने लगाया आरोप: भोपाल नगर निगम ने आरोपों को किया खारिज

    02-Aug-2026
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bhopal
भाेपाल, 1 अगस्त (वि.प्र.)
मध्य प्रदेश की राजधानी भाेपाल में सामाजिक कार्यकर्ताओं के एक समूह ने शुक्रवार काे आराेप लगाया कि 1984 की भाेपाल गैस त्रासदी से प्रभावित इलाकाें में नगर निगम द्वारा आपूर्ति किए जाने वाले पीने के पानी के 68% नमूनाें में सीवेज का संदूषण (दूषित जल) पाया गया है. कार्यकर्ताओं और क्षेत्र के निवासियाें द्वारा किए गए परीक्षणाें में ‘फिकल काेलीफाॅर्म’ (मल संबंधी जीवाणु) की उपस्थिति पाई गई है.
 
गैस त्रासदी के पीड़िताें का प्रतिनिधित्व करने वाले चार संगठनाें के कार्यकर्ताओं के अनुसार, बंद पड़ी ‘यूनियन कार्बाइड’ फैक्ट्री (जाे त्रासदी का स्थल थी) के आसपास की 30 बस्तियाें से 63 नमूने लिए गए थे. 2 जुलाई से 22 जुलाई के बीच किए गए परीक्षणाें में से 43 नमूनाें में सीवेज प्रदूषण पाया गया. इस बीच, भाेपाल नगर निगम (बीएमसी) ने दावा किया कि जुलाई में नागरिक निकाय द्वारा किए गए परीक्षणाें में सभी 61 नमूनाें में से किसी में भी अशुद्धियां नहीं पाई गईं.
 
उन्हाेंने आराेप लगाया कि दूषित पानी की आपूर्ति से क्षेत्र में इंदाैर के भागीरथपुरा जैसी स्थिति बन रही है, जहां दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 में सरकार द्वारा आपूर्ति किए गए सीवेज-दूषित पानी के कारण 35 से अधिक लाेगाें की जान चली गई थी.
कार्यकर्ताओं ने अपनी निष्कर्ष रिपाेर्ट पेश करते हुए एक प्रेस काॅन्फ्रेंस में कहा, हमने इस महीने 30 बस्तियाें के नलाें से पानी के 63 नमूनाें का परीक्षण किया और 43 नमूनाें में ‘फिकल काेलीफाॅर्म’ की पुष्टि हुई. इस बात के स्पष्ट सबूत हैं कि 30 में से 19 बस्तियाें में आपूर्ति किया जाने वाला पीने का पानी सीवेज/मल से दूषित है.
उन्हाेंने दावा किया कि 12 बस्तियां ऐसी थीं जहां पानी के सभी नमूने दूषित पाए गए, जिनमें कुछ ऐसे क्षेत्र भी शामिल हैं जहां हाल के वर्षाें में पाइपलाइन बिछाई गई थीं.
 
तालाब के पानी के 90% सैम्पल दूषित ‘भाेपाल ग्रुप फाॅर इंफाॅर्मेशन एंड एक्शन’ की रचना ढींगरा ने बताया कि शहर के बड़ा तालाब से आपूर्ति किए जाने वाले पीने के पानी के 90% नमूने और काेलार बांध से आपूर्ति किए जाने वाले पानी के 25% नमूने दूषित पाए गए.
नर्मदा नदी से आपूर्ति किए जाने वाले पानी के चार नमूने प्रदूषण-मुक्त (नेगेटिव) पाए गए.