नई दिल्ली, 24 अगस्त (वि.प्र.)
प्याज 65 और श्नकर अब 71 रुपये किलाे के पार पहुंच जाने से आम आदमी परेशान है. इस कमरताेड़ महंगाई से लाेगाें का जीना दूभर हुआ है. 10 दिन में चीनी के दाम में 17 रुपये तक उछाल आया है.
सावन में प्याज से भले ही लाेग दूरी बनाए हुए हैं और त्याेहार अभी दूर हैं ताे चीनी की रिटेल डिमांड भी बहुत अधिक नहीं है, लेकिन ये दाेनाें चीजें आम आदमी की कमर ताेड़ने की हाेड़ लगा रखी हैं. एक महीने पहले 25 रुपये मिलने वाला प्याज कई जगहाें पर 65 रुपये के पार है ताे चीनी 71 रुपये किलाे के ऊपर चली गई है. हालांकि, माेदी सरकार भी प्याज और चीनी के दाम पर लगाम लगाने के लिए पूरी तरह कमर कस चुकी है. देशभर में प्याज के दाम तेजी से बढ़ने की वजह अचानक मांग बढ़ना नहीं, बल्कि पुराने रबी स्टाॅक के खत्म हाेने और नई फसल की आवक के बीच पैदा हुआ माैसमी अंतर है. उपभाेक्ता मामलाें के विभाग के आंकड़ाें के मुताबिक, 22 अगस्त काे देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत करीब 42 रुपये प्रति किलाे पहुंच गई. यह एक साल पहले के मुकाबले करीब 45 फीसदी और पिछले महीने की तुलना में 19 फीसदी ज्यादा है.
दिल्ली में प्याज 65 रुपये किलाे तक पहुंच गया है, जबकि एक साल पहले यहां भाव करीब 35 रुपये था. चेन्नई में भी कीमत 58 रुपये किलाे हाे गई है, जाे पिछले साल 33 रुपये थी. भारत में प्याज की कीमताें का बड़ा हिस्सा इसकी माैसमी आवक पर निर्भर करता है. मार्च-अप्रैल में तैयार हाेने वाली रबी प्याज की फसल देश की मुख्य भंडारण वाली फसल है. यही स्टाॅक कई महीनाें तक बाजार की जरूरत पूरी करता है और आमताैर पर अक्टूबर तक आपूर्ति का प्रमुख स्राेत रहता है, लेकिन इस साल पुराने स्टाॅक पर दबाव ज्यादा है. महाराष्ट्र में मार्च-अप्रैल के दाैरान बेमाैसम बारिश और ओलावृष्टि से देर से तैयार हाेने वाली फसल और स्टाेर किए हुए प्याज की गुणवत्ता प्रभावित हुई.